_तीन सवालों में उलझी_
वुहान वायरस लीक थ्योरी
अमेरिकी राष्ट्पति जो बिडेन ने अपनी सेक्रेट एजेंसी से इस बात का पता लगाने को कहा है की कोरोना वायरस क्या वाकई वुहान की लैब से आया था ? आखिर क्या है वुहान वायरस लीक थ्योरी का सच ?
विश्व व्यवस्था जब-जब जैवीय संक्रमण के दौर से गुजरी है, संसार की कुछ ताकतें उसमें नए मौके
तलाश करने और स्वयं को विजयी बनाने के लिए कई तरह के खेल खेलती रही हैं, जो संभवतः
मानवता के विरुद्ध सिद्ध हुए। इतिहास ने इसे कई बार दोहराया है। तो क्या वाशिंगटन और बीजिंग के
बीच कोरोना वायरस की वुहान लीक थ्योरी पर चल रहा टकराव इतिहास दोहराने के लिए विवश
करेगा? हालांकि वायरस लीक को लेकर जितने एक्सपेरिमेंट और स्टडी किये गए है , वे सभी चीन के
दोषी होने की संभावनाएं व्यक्त करते हैं, परंतु अभी किसी निष्कर्ष व निर्णय पर नहीं पहुंचा जा
सकता है। फिर भी यह आशंका हो रही है कि वृहान वायरस लीक थ्योरी निष्कर्ष तक पहुंचते-पहुंचते
किसी वॉर या कोल्डवार से विश्व का साक्षात्कार न करा दे। गौरतलब है कि पिछले दिनों साइंस
मैगजीन 'बुलेटिन ऑफ एटॉमिक साइंटिस्ट' के लेखक निकोलस वेड ने कोरोना वायरस के वुहान
इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी की लैब में तैयार किए जाने की बात लिखी थी। हाल ही में 'वॉल स्ट्रीट
जर्नल' में अमेरिकी इंटेलिजेंस की खुफिया रिपोर्ट के प्रकाशित होने के बाद से चीन पर संदेह और बढ़
गया है और अमेरिका पर कार्रवाई करने का दबाव भी। हालांकि सच यह भी है कि चीन के एक्सपोज
होने से उसके छींटे अमेरिका तक भी पहुंच सकते हैं। यह भी संभव है कि अमेरिका केवल जांच की
फॉर्मेलिटी पूरी करे। दूसरी बात कि यदि चीन रिवर्स इंजीनियरिंग वर्जन से असलियत छुपाने की
कोशिश कर रहा है तो वह किसी भी हाल पर अमेरिका को जांच नहीं करने देगा। लेकिन उस संशय
से दुनिया को मुक्त करना बेहद जरूरी है जिससे वह इस समय गुजर रही है। इसलिए सच का सामने
आना भी बेहद जरूरी है।
इन 3 सवालों के जवाब से खुलेगा वुहान वायरस लीक थ्योरी का राज
पहला अमेरिका ने फिर से
सवाल जांच क्यों शुरू की?
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने Wuhan Virus Leak के सच का पता लगाने के लिए अपनी गुप्त
एजेंसी को 90 दिन का वक़्त दिया है। क्या 90 दिन का कोई विशेष मतलब है या फिर यह सामान्य
कार्य शैली का हिस्सा है? राष्ट्रपति बाइडन ने पद ग्रहण के बाद ट्रंप के दौरान हुए जांच पर रोक लगा
दी थी। इसका संदेश व असर जनता पे गलत गया था। संभवता अब वे इस गलती को सुधारना चाहते
हैं। इसका सबसे बड़ा रणनीतिक पहलू यह हो सकता है कि बाइडेन 90 दिन की नियत समय
निर्धारित कर यह संदेश देना चाहते हैं कि अमेरिकी प्रशासन दुनिया के प्रति बेहद संवेदनशील और
उनकी चिंताओं के प्रति गंभीर है । और अमेरिका Civil and Human rights के हित के लिए चीन
के खिलाफ किसी भी सीमा तक जा सकता है। संभवतः इसके जरिए वे वुहान लीक थ्योरी पर पनप
रहे चीन विरोधी सिंड्रोंम का इस्तेमाल चींन के विरुद्ध एक हथियार के रूप में करना चाहते हैं। इसके
अलावा सहयोगी देशों द्वारा वुहान लीक थ्योरी की जांच की मांग पर इस तरह का निर्णय नई
एकजुटता का आधार बन सकता है। चूंकि अमेरिका इस मामले में पिछले चार वर्षों से कमजोर पड़ता
दिख रहा है। इसलिए बाइडेन इस मौके को हर हाल में फ़ायदा उठाना चाह रहे हैं।
दूसरा सवाल
चीन जैविक युद्ध की
तैयारी कर रहा है?
वीकेंड ऑस्ट्रेलियन में पब्लिश एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन ने 2015 से ही सॉर्स
कोरोना वायरस को Bio Weapon के रूप में इस्तेमाल करने संबंधी संभावनाओं को तलाशना
शुरू कर दिया था। 'अननैचुरल ओरिजन ऑफ सॉर्स एंड न्यूस्पेसीज ऑफ मैनमेड वायरस' वाले टाइटल
से छपी इस रिपोर्ट में चीन की global ambitions को स्पष्ट करते हुए बताया गया
है कि चीन के साइंटिस्ट और उसकी आर्मी जिन जैविक हथियारों पर विश्वसनीयता के साथ भरोसा
कर सकती है, उनमें कोरोना वायरस हो सकता है। इस रिपोर्ट में जो साक्ष्य पेश किए किए हैं, उनके
अनुसार चीन थर्ड वर्ल्ड वॉर की तैयारी कर रहा है जो बायोलॉजिकल और जेनेटिक हथियारों से लड़ा
जाएगा। वैसे चीन के लिए कुछ भी नहीं कहा जा सकता। वह वास्तव में न लोकतंत्र की मर्यादाओं में
बंधा है और न नैतिकता की। इसलिए उस पर लग रहे आरोपों को सिरे से खारिज तो नहीं किया जा
सकता। फिर भी अभी इस निष्कर्ष को अपनाना कठिन है कि चीन तीसरे विश्वयुद्ध की तैयारी में है
क्योंकि इसके बाद चीन भी और उसकी अर्थव्यवस्था भी खत्म हो जाएगी।
तीसरा क्या न्यूयॉर्क-वुहान के
सवाल बीच भी कनेक्शन है?
डोनाल्ड ट्रंप कोरोना वायरस के वुहान चीन से सम्बन्ध के मामले
में बेहद आक्रामक रहे लेकिन बाइडेन के आते ही पिछली जांच
रोक दी गई थी। अब जरूर बाइडेन ने फिर से अपनी खुफिया
एजेंसियों को आदेश दिया है कि वे यह पता लगाएं कि कोरोना
वायरस कहां से फैला। दरअसल अमेरिकी प्रशासन द्वारा यह कदम
'वॉल स्ट्रीट जर्नल' में अमेरिकी इंटेलिजेंस की खुफिया रिपोर्ट
के प्रकाशित होने के बाद उठाया गया है जिसमें कहा गया है कि
वर्ष 2019 में 'वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी' की एक लैब
के तीन शोधकर्ता सार्स वायरस से इन्फेक्टेड हुए थे। चीन ने इसके
पलट अमेरिका के खिलाफ ही निशाना साध लिया। उसका कहना
है कि फोर्ट डेट्रिक में मौजूद बायोलॉजिकल लैब और दुनिया भर
200 से ज्यादा Bio-Lab बनाने के पीछे अमेरिका का असल
मकसद क्या है, पहले अमेरिका दुनिया को यह बताएं। ध्यान रहे
कि वुहान "इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी" को फंड उपलब्ध कराने का
काम "इकोहेल्थ एलायंस ऑफ न्यूयॉर्क" (अमेरिका) करता है। यानी
न्यूयॉर्क और वुहान के बीच कनेक्शन तो है, लेकिन इसका पूरा
सच क्या है, ये आना अभी बाकी है और ये समय ही बताएगा ।
सबसे बड़ा सवाल....क्या होगा अब आगे?
जैसे-जैसे शोध रिपोर्ट आ रही हैं, चाइना कठघरे में फंसता जा रहा है और दुनिया
जांच का पता लगाने के लिए विचारशील होती जा रही है। लेकिन असलियत का पता लगाएगा
कौन? कोई वैश्विक संस्था या फिर अमेरिका? वैश्विक संस्थाएं सही अर्थों में तो
निष्कर्षहीन हो चुकी हैं, इसलिए उनसे आशा नहीं की जा सकती। तो क्या अमेरिका
जांच करेगा? और क्या चीन उसे ऐसा करने देगा? पहली बात तो यह कि वर्ष
2018 और 2019 में चीन की डॉ.शी झेंगली को नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एलर्जी
एंड इंफेक्शस डिजीज से फंड मिल रहा था। यह अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट
ऑफ हेल्थ का हिस्सा है। डॉ.शी झेंगली वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के
वैज्ञानिकों की टीम का नेतृत्व कर रही थीं। यानी चीन के एक्सपोज होने से छींटे
अमेरिका तक भी पहुंच सकते हैं।
क्या है कोरोना का वुहान कनेक्शन?
अब तक की पड़ताल से इस बात के संकेत मिल रहे हैं कि कोरोना वायरस वुहान
इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी की बीएसएल 2 लैब में बनाया गया और वहीं से
लीक हुआ।लेकिन चीन ने इस वायरस को रिवर्स-इंजीनियरिंग वर्जन से छिपाने
की कोशिश की जिससे यह लगे कि कोरोना वायरस चमगादड़ से प्राकृतिक
रूपसे विकसित हुआ है। वैज्ञानिक जर्नल क्वार्टरली रिव्यू ऑफ बायोफिजिक्स
डिस्कवरी में प्रकाशित शोध अध्ययन भी इसकी पुष्टि करता है। इसमें ब्रिटिश
प्रोफेसर एगस डल्गलिश और नार्वेनियन साइंटिस्ट डॉ. बिर्गर सोरेनसेन ने उन
कड़ियों को जोड़ने में सफलता हासिल की है जो बताती हैं कि चीनी विज्ञानियों
ने किस तरह से कोरोना वायरस तैयार करने वाले उपकरण बनाए जिसमें कुछ
अमेरिकी विश्वविद्यालयों ने भी सहयोग किया।
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