Detail Info- Police F.I.R/पुलिस एफआईआर (Part-1)


 कम शब्दों में स्पश्ट ब्योरा देने वाली हो रिपोर्ट 

Police-F.I.R-पुलिस-एफआईआर

एफआईआर एक ऐसा दस्तावेज होता है जिसके आधार पर पुलिस दोषी को सजा दिलाने के लिए कार्यवाही शुरू करती है। सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि किस तरह के मामले में केस दर्ज होता है।

  किसी व्यक्ति के साथ कोई अपराध होता है तो थाने में उस अपराध की रिपोर्ट लिखवाने को 

फर्स्ट इन्फॉर्मेशन रिपोर्ट यानी एफआईआर कहा जाता है। रिपोर्ट थाने के रजिस्टर में दर्ज कराने के 

बाद इसकी एक कॉपी रिपोर्ट लिखवाने वाले को भी दी जाती है, जिस पर संबंधित थाने की मुहर होती 

है। इसके बाद थाने के रजिस्टर में लिखा जाता है कि सूचना की एक कॉपी शिकायतकर्ता को दी जा 

चुकी है। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस या तो तुरंत जांच शुरू कर देती है या कुछ समय लेती है। 

यह इस बात पर निर्भर करता है कि अपराध कितना संगीन है।

             आपकी शिकायत पर हुई प्रगति की सूचना संबंधित पुलिस कर्मी समय-समय पर 

आपको देता रहेगा या डाक से भेजेगा, ऐसी व्यवस्था हमारे कानून में बनाई गई है। पुलिस जांच में 

यह पता लगता है कि अपराध किसी और थाना क्षेत्र में हुआ है तो पीड़ित का केस उस थाने को 

ट्रांस्फर कर दिया जाता है। एफाईआर मुफ्त में लिखी जाती है। कई बार ऐसा भी होता है कि पुलिस 

रिपोर्ट दर्ज नहीं करती। ऐसे में पीड़ित मजिस्ट्रेट के सामने जाता है। यदि वहां भी सुनवाई नहीं हुई

तो इसके पीछे कोई कारण रहा होगा। वह कारण भी जानने का आपको अधिकार है।

 एफआईआर लिखवाने का सही तरीका क्या है?

एफआईआर कम से कम शब्दों में टू द पॉइंट लिखवाना चाहिए। कोर्ट में केस इसी रिपोर्ट के आधार 

पर आगे बढ़ता है। रिपोर्ट लिखाते समय इन बातों का ध्यान रखें-

कब : किस तारीख को किस समय घटना हुई।

कहां : किस जगह, स्थान का नाम।

किसने : अपराध किस व्यक्ति ने किया (ज्ञात या अज्ञात)। इसमें कितने लोग शामिल थे।

पीड़ित : किसके साथ अपराध हुआ, पीड़ित एक है या कई।

किसके लिए : यह मुख्य विषय होता है। इसी से पता चलता है कि कोई काम अपराध है या नहीं।

किसके सामने : अगर घटना के समय कोई मौजूद रहा हो तो उनकी जानकारी रिपोर्ट में दें। यहां यह 

जरूरी है कि सामने वाला गवाही देने को तैयार है या नहीं।

किससे : अपराध में किसी हथियार का प्रयोग हुआ हो तो बताएं।

किस तरह : अपराध करने के लिए कौन सा तरीका अपनाया गया।

किया : इन सभी बिंदुओं को मिलाकर की गई घटना अपराध की श्रेणी में आती है। ये सभी जरूरी बातें रिपोर्ट लिखवाने के समय याद रखना चाहिए।

  जाने संज्ञेय और असंज्ञेय अपराध क्या होता है 

 सुप्रीम कोर्ट के शब्दों में- प्रथम सूचना रिपोर्ट का उद्देश्य कथित आपराधिक गतिविधि के बारे में जानकारी प्राप्त करना होता है। ताकि पुलिस जांच कर सबूत इकट्ठा कर सकें और असल अपराधी को पकड़ सके।

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 कानून की भाषा में अपराध दो तरह के होते हैं- संज्ञेय और असंज्ञेय। संज्ञेय अपराध यानी जिसमें 

तीन वर्ष या उससे अधिक की सजा का प्रावधान है, में लिखित एफआईआर दर्ज की जाती है। इनमें 

हत्या, दुष्कर्म, डकैती, देशद्रोह, आतंकवाद फैलाना जैसे गंभीर मामले आते हैं। ऐसे अपराध में पुलिस 

बिना वारंट के किसी व्यक्ति को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ जांच शुरू कर सकती है। एफआईआर 

खुद दर्ज कर सकती है। फिर सबूत जुटाकर मामला कोर्ट में चलता है। सबूत पुख्ता हुए तो आरोपी को

सजा होती है। गंभीर अपराध के मामले में पुलिस को जांच के लिए अदालत से किसी आदेश की 

जरूरत नहीं होती। वहीं, असंज्ञेय अपराध में मामूली मारपीट, घरेलू झगड़े, पारिवारिक मनमुटाव, बच्चों 

के विवाद में बड़ों का शामिल होना, वस्तु खो जाना, टू-व्हीलर से किसी से टकरा जाना या देन-देन के 

मामले में झगड़ना आदि आते हैं। ऐसे मामले में सीधे तौर पर एफआईआर दर्ज नहीं की जाती, बल्कि

मौखिक शिकायत दर्ज होती है। पुलिस हिदायत देकर समझा देती है। यदि कोई व्यक्ति फिर भी न 

माने तो सादे कागज पर शिकायत ली जाती है। जब थाने में समझौता नहीं होता तो मामला 

मजिस्ट्रेट को भेज दिया जाता है।

 आप भी समझें क्या होती है जीरो एफआईआर

इसे जीरो पर कायमी करना भी कहते हैं। दरअसल, हर पुलिस स्टेशन का एक अधिकार क्षेत्र होता है। 

जीरो एफआईआर में यह सुविधा मिलती है कि अगर कोई पीड़ित अपने इलाके के पुलिस स्टेशन में 

नहीं पहुंच पा रहा है तो जीरो FIR के तहत वह किसी अन्य पुलिस स्टेशन में केस दर्ज करवा सकता 

है। इसके बाद संबंधित थाना, जिस क्षेत्र में घटना हुई है, वहां के ज्युरिडिक्शन वाले पुलिस स्टेशन में 

इसे भेज दिया जाता है। वहां अपराध संख्या के साथ इसे दर्ज कर लिया जाता है।

 यह है जीरो एफआईआर शुरू करने का उद्देश्य

पुलिसिया आनाकानी में किसी को न्याय से वंचित न होना पड़े। शिकायत दर्ज नहीं होने और पुलिस 

कार्रवाई में देरी की स्थिति में सबूत नष्ट होने का खतरा होता है।यदि जीरो पर कायमी नहीं की जाती 

है तो (Accused person)पीड़ित व्यक्ति (senior police)वरिष्ठ पुलिस अधिकारी से शिकायत कर सकता है।

 इसके लिए गृह मंत्रालय ने जारी की एडवाइजरी

जीरो पर कायमी को लेकर गृह मंत्रालय ने भी 2015 में सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को कंपल्सरी

एफआईआर की एडवाइजरी जारी की थी। इसमें साफ कहा गया है कि यदि समय पर जीरो  

एफआईआर नहीं हुई तो सबूत नष्ट हो सकते हैं।

एंटी करप्शन कॉउंसिल ऑफ इंडिया को शिकायत  करें  

एक बार एफआईआर दर्ज कर ली गई तो पुलिस मामले की जांच करने के लिए कानूनी रूप से बाध्य हो जाती है। जांच में सबूत जमा करना, गवाहों से पूछताछ, अपराध स्थल का निरीक्षण व बयान दर्ज करना आदि शामिल हैं।  


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कई बार देखा जाता है कि पुलिस एफआईआर दर्ज करने में आनाकानी करती है। छोटे-मोटे

अपराध की रिपोर्ट लिखाने जाते हैं तो पुलिस डांटकर भगा देती है। बड़े अपराध की रिपोर्ट 

लिखने के बजाय सादे कागज पर आवेदन ले लेती है अथवा गंभीर अपराध में साधारण

धाराएं जोड़कर केस कमजोर कर देती है। इसके पीछे कारण यह है कि अपने क्षेत्र में दर्ज

हुए मामलों की संख्या कम दिखाने के साथ ही अपराध की जांच आदि के झंझट से बचने

के लिए रिपोर्ट लिखने में आनाकानी की जाती है। अगर आपको भी ऐसी दिक्कत का सामना

करना पड़े, तो हिम्मत मत हारिए। पुलिस के खिलाफ शिकायत 'एंटी करप्शन काउंसिल

ऑफ इंडिया' को की जा सकती है।

       पुलिस के वरिष्ठ अफसरों को शिकायत भेजें : इससे अलावा, अपने जिले के एसपी को 

शिकायत भेजें। शिकायत में ऐसे तथ्य हों जो किसी अपराध की श्रेणी में आते तो एसपी मामले की 

जांच करेंगे। आप पुलिस अधीक्षक या अन्य उच्च अधिकारियों जैसे पुलिस उपमहानिरीक्षक और पुलिस 

महानिरीक्षक से मिलकर अपनी शिकायत उनके संज्ञान में ला सकते हैं। चाहें तो डाक से भी शिकायत 

भेज सकते हैं। इसके बावजूद उचित कार्रवाई नहीं होती है तो मजिस्ट्रेट से शिकायत करें। ऐसे में 

मजिस्ट्रेट मामले की जांच या दोबारा जांच के आदेश पुलिस को दे सकते हैं।

» वकील के माध्यम से रिपोर्ट दर्ज करा सकते हैं  

एक तरीका यह भी है कि यदि थाने में आपकी रिपोर्ट नहीं लिखी जाती है तो वे सभी आवेदन

जो आपने थाने या एसपी ऑफिस में दिए हैं, उनकी प्रति लेकर किसी वकील के माध्यम से

 न्यायालय की शरण में जाएं। वहां पूरे विवरण के साथ अपनी शिकायत दर्ज करवाने के लिए

आवेदन करें। याद रखें, एफआईआर में लिखा क्राइम नंबर भविष्य में रेफरेंस के तौर पर

इस्तेमाल किया जाता है, इसे डायरी में भी लिख लें।

» मानवाधिकार आयोग को भेजें

संबंधित सभी अफसरों से निराशा हाथ लगे तो अंत में राज्य मानवाधिकार आयोग अथवा राष्ट्रीय

मानवाधिकार आयोग का दरवाजा खुला हुआ है। आप अपनी शिकायत मानवाधिकार आयोग को भेजें।

» बच्चों-महिलाओं के मामले की ऑनलाइन शिकायत

किसी महिला या बच्चे से संबंधित मामला है और पुलिस मामला दर्ज करने या उसकी जांच

कराने में आनाकानी करती है तो उसका पूरा ब्योरा www.min-wcd@nic.in पर मेल कर दें।

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 Mobile Khone-Chori hone pe kya kare?
 

 



Mobile Khone-Chori hone pe kya kare?

 

Mobile Khone-Chori hone pe पुलिस की वेबसाइट पर शिकायत जरूर दर्ज करें 

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मोबाइल फोन के बढ़ते महत्व के साथ, हैंडसेट एक मूल्यवान वस्तु 

बन गया है। आधुनिक फीचर्स होने से यह तब और महत्वपूर्ण हो 

जाता है, जब आपका मूल्यवान डेटा इसमें संग्रहित रहता है। 

मोबाइल गुम होने, चोरी होने की घटनाएं लगातार होती रहती हैं। पुलिस में शिकायत करने पर भी 

जल्द राहत नहीं मिलती। यहां तक कि पुलिस आपकी रिपोर्ट भी दर्ज नहीं करती है। कुछ दिन इंतजार 

करने के बाद परेशान होकर आप मायूस हो जाते हैं। ऐसे में कुछ राज्यों ने ऑनलाइन एफआईआर 

दर्ज कराने की सुविधा दी हुई है। इसके अलावा, पुलिस के कई एप प्रचलन में हैं, जहां मोबाइल खोने 

की सूचना दी जा सकती है। इसके लिए मोबाइल के आईएमईआई नंबर, ईमेल आईडी, चालू मोबाइल 

नंबर, पता और अन्य संबंधित जानकारी की जरूरत होती है। यदि यह सब आपके पास है तो अपने 

राज्य की पुलिस विभाग की वेबसाइट पर जाए, पंजीकरण करें फिर शिकायत दर्ज करें। याद रखें, कोई 

भी व्यक्ति आसानी से. ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर सकता है। इस विषय में हम आपको जरूरी 

जानकारी दे रहे हैं, जिससे आपकी मुश्किल आसान हो सकती है।

 ईएमईआई नंबर

नया मोबाइल खरीदते ही पहला काम यह करें कि उसका IMEI नंबर किसी डायरी में लिखकर रख लें। 

हैंडसेट गुमने या चोरी होने पर यह बहुत काम आता है।

नेटवर्क ऑपरेटर को कॉल करें

आपके फोन से होने वाली किसी भी तरह की धोखाधड़ी को रोकने के लिए तुरंत अपने नेटवर्क 

ऑपरेटर को कॉल कर सिम निष्क्रिय करने को करें। क्योंकि यह आपके क्रेडिट, डेबिट कार्ड और यहां 

तक कि बैंक खातों से भी लिंक रहती है।

सभी पासवर्ड बदल लें

मोबाइल में लगी आपकी सिम से जीमेल, फेसबुक, ट्वीटर आदि ऑपरेट होते हैं। इसलिए इन सभी के 

पासवर्ड तुरंत बदलकर अपना डेटा सुरक्षित कर लें।

 रिपोर्ट दर्ज कराएं

ऑनलाइन रिपोर्ट दर्ज कराने के बाद जिस क्षेत्र में मोबाइल गुमा-चोरी हुआ, वहां से पुलिस स्टेशन पर 

जाकर भी रिपोर्ट दर्ज कराएं। एफआईआर दर्ज कराने के बाद उसकी कॉपी लेना न भूलें, क्योंकि इसके

बाद एफआईआर की स्थिति का पता लगाया जा सकता है।

अपने बैंक अथवा आपकी क्रेडिट कार्ड कंपनी से संपर्क करें

आपको लगता है कि फोन में बैंक-क्रेडिट कार्ड संबंधी जरूरी डेटा है या खाता नंबर, पासवर्ड दर्ज हैं। 

वैसी स्थिति में आप अपने बैंक और जिस कंपनी का क्रेडिट कार्ड है, उन्हें मोबाइल गुम होने की 

सूचना देकर सभी ट्रांजेक्शन रुकवा दें।

IMEI नंबर बदलने पर भी ट्रैक हो सकेगा मोबाइल

Mobile-Khone-Chori-hone-pe-kya-kare?Mobile-Khone-Chori-hone-pe-kya-kare?

      मोबाइल का आईएमईआई नंबर उसकी अंतरराष्ट्रीय पहचान 

बताता है। हर मोबाइल फोन का आईएमईआई नंबर अलग होता है। 

इस नंबर की सहायता से आसानी से पता चलता है कि मोबाइल 

कहां है।

 दूरसंचार प्रौद्योगिकी केंद्र (सी-डॉट) ने चोरी या गुम हुए मोबाइल का पता लगाने के लिए सेंट्रल 

इक्विपमेंट आइडेंटिटी रजिस्टर (CEIR) https://ceir.gov.in/Home/index.jsp तैयार किया है। इससे 

मोबाइल को चोर के द्वारा उपयोग में लाने से पहले बंद किया जा सकता है। यदि मोबाइल में आपका 

जरूरी डेटा है तो कुछ हद तक वह सुरक्षित रह सकता है। देश के 22 अन्य दूरसंचार सर्कल में इसे 

लागू कर दिया गया है। सीईआईआर में देश के हर नागरिक के मोबाइल का मॉडल, सिम नंबर और 

IMEI नंबर मौजूद है। मोबाइल के मॉडल पर उसे बनाने वाली कंपनी द्वारा जारी IMEI नंबर के 

मिलान की तकनीक भी सी-डॉट ने ही विकसित की है। इसके अलावा एक तकनीक और पुलिस को दी 

गई है कि अगर आपके चोरी हुए मोबाइल का आईएमईआई नंबर चोर बदलवा लेता है (जो कि संभव 

है) तो भी पुलिस मोबाइल फोन को ट्रैक कर सकती है। पुलिस तो अपना काम करती रहेगी, आप 

इंटरनेट ठीक तरह चलाना जानते हैं, सर्फिँग में आपकी रुचि है तो आप भी कुछ उपाय कर पुलिस से 

पहले अपने मोबाइल का पता लगा सकते हैं। इसके लिए आपको कुछ तरीके अपनाने होंगे जिससे 

आप ऐसा कर सकते हैं।

 जिपनेट पर चोरी हुए मोबाइल फोन की सूची ऐसे देखें

.

जोनल इंटीग्रेटेड पुलिस नेटवर्क (ZIPNET) पुलिस की एक साइट है। यहां अपना लॉगइन बनाएं

और विभिन्न राज्यों में गुम या चोरी हुए मोबाइल का पूरा विवरण देखें। कोई नया मोबाइल फोन

खरीदने से पहले आप जिपनेट जरूर चेक करें, ताकि आप गलत मोबाइल खरीदने से बच सकें।

फिल्टर ऑप्शनः इसका उपयोग किसी विशेष राज्य, जिला या पुलिस स्टेशन से संबंधित सभी

रिकॉर्ड देखने के लिए किया जा सकता है।

सर्चः इस विकल्प से चोरी, गुम हुए मोबाइल की पूरी जानकारी डिटेल में प्राप्त कर सकते हैं।

केंद्रीय डेटाबैंक से आपके काम की जानकारी निकालने का यह बहुत ही आसान तरीका है।

अपने मोबाइल का IMEI नंबर जानने के लिए: * # 06 # टाइप करें।

थीफ ट्रैकर : यह एप्लीकेशन आपको फोन चोरी करने वाले व्यक्ति के बारे में जानकारी देगी।

साथ ही आपके मोबाइल को लॉक भी कर देगी ताकि कोई उसका गलत इस्तेमाल न कर

सके। इसके अलावा इसका जो सबसे खास फीचर है वो है इसका कैमरा। यह एप्लीकेशन

आपके फोन के कैमरे से उस व्यक्ति का फोटो खींचकर आपको सेंड भी कर देगी जिससे

आप मोबाइल की सही लोकेशन के बारे में जान सकते हैं।

14422 नंबर पर डायल करते ही रिपोर्ट दर्ज होगी

गूगल आपकी हर गतिविधि पर नजर रखता है। आपका हर प्रकार 

का डेटा गूगल पर स्टोर रहता है। ऐसी स्थिति में गूगल से ट्रैकिंग 

एप्स इंस्टॉल करके आप अपने मोबाइल की लोकेशन पता कर 

सकते हैं।

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 मोबाइल चोरी के मामले में पुलिस आपको बहुत सहयोग नहीं करती। सरकार भी यह जानती है, 

इसलिए आपकी मदद की खातिर सरकार ने हेल्पलाइन नंबर 14422 जारी किया हुआ है। इस नंबर 

पर डायल करने पर आप अपना ईएमईआई नंबर बताएं और कहें कि आपका फलां कंपनी का फलां 

मॉडल का मोबाइल चोरी हो गया है। इस संदेश के भेजते ही आपकी शिकायत दर्ज हो जाती है। अपने

डिवाइस को स्ट्रांग पासवर्ड या पासकोड के साथ लॉक किया करें, ताकि कोई आपके अकाउंट्स या 

अन्य निजी जानकारी तक पहुंच न सके।

         आपका हर प्रकार का डेटा गूगल पर स्टोर रहता है, इसलिए गूगल से आप अपने मोबाइल 

की लोकेशन पता कर सकते हैं। इसके लिए जी-मेल पर आपका अकाउंट होना जरूरी है। इसके बाद 

आप गूगल के 'एंड्राइड डिवास मैनेजर' एप पर जाएं। जी-मेल आईईडी से लॉगइन करें। लॉगइन करते

ही आपको अपने मोबाइल की लोकेशन दिखाई देगी। इसके लिए जरूरी है कि आपका मोबाइल ऑन हो।

 मोबाइल चोरी होने पर ये काम जरूर करें

👍ट्रैकिंग एप्स इंस्टॉल करें : ऐसे बहुत सारे एप्स आसानी से मिल सकते हैं जो खोए हुए मोबाइल का 

पता लगाने में मदद कर सकते हैं। एंड्रॉइड डिवाइस के लिए एंड्रॉइड डिवाइस मैनेजर और आईओएस 

डिवाइस के लिए ये ऐप, 'फाइंड माय आईफोन' सर्विस इंस्टॉल कर सकते हैं।

👍डेटा ऑनलाइन सिंक करें : हमेशा आपके डेटा को जीमेल, गूगल पर स्टोर करें। यदि मोबाइल गुम 

जाता है तो आप अन्य डिवाइस की मदद से गूगल से अपना जरूरी डेटा लेकर काम चला सकते हैं।

👍परिवार-दोस्तों को सूचित करें : जब आपका फोन स्विच ऑफ हो जाएगा तो उन्हें आपकी चिंता 

होगी। आप शहर से दूर हैं और फोन खो जाता है तो सबसे पहले परिवार के सदस्यों और दोस्तों को 

सूचित करें।

👍बिल संभालकर रखें : पुलिस जब आपका मोबाइल खोज लेगी तो आपको सौंपने से पहले उसका 

बिल जरूर देखेगी। यदि बिल नहीं दिखा पाए तो आपको मोबाइल नहीं सौंपा जाएगा।

 ऐसे जानें अपने मोबाइल का IMEI नंबर

जब फोन चोरी हो जाए, गुम जाए तो इंटरनेशनल मोबाइल इक्विपमेंट आइडेंटिटी

( IMEI) नंबर खोजना एक चुनौती होता है। मोबाइल खरीदते ही अपनी अलग-अलग

डायरियों में IMEI नंबर दर्ज कर लिया करें। मोबाइल बिल तथा उसके बॉक्स पर भी यह

नंबर लिखा होता है। इसके अलावा सभी मोबाइल फोन में IMEI नंबर बैटरी के ठीक

नीचे मोबाइल के बैक पेनल पर लिखा हो सकता है। एक तरीका और है- आप अपने

मोबाइल पर # 06 # डायल करके भी यह नंबर जान सकते हैं।

                                                                                   


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    😇 LAST WILL & TESTAMENT-2 : All things U hav to know about Wasiyat 😇

                 🙏🙏         🙏🙏         🙏🙏                


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