मन की सेहत (हैल्थ&वेलनेस)
दुनिया में हर 10 में से एक व्यक्ति मानसिक समस्या से पीड़ित है।
डब्ल्यूएचओ की 2017 की एक रिपोर्ट के अनुसार विश्व भर में इस समय लगभग 80 करोड़ व्यक्ति किसी न
किसी तरह की मानसिक समस्या से पीड़ित हैं। यानी हर दस में से एक व्यक्ति इसका शिकार है। पूरी दुनिया में
15 से 29 वर्ष की उम्र के युवाओं में मृत्यु के प्रमुख कारणों में आत्महत्या है। और इसके लिए अवसाद सबसे बड़ा
कारण है। देश में 14 प्रतिशत लोग किसी न किसी मानसिक समस्या से परेशान हैं। 4 करोड़ लोगों को डिप्रेसिव
डिस्ऑर्डर और 5 करोड़ लोगों को एंग्जायटी डिस्ऑर्डर की समस्या है। लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर
परिस्थितियों का असर तो है ही नींद का भी गहरा असर है। कम या बहुत अधिक नींद, भोजन में पोषक तत्वों की
कमी, असंतुलित जीवनशैली,एक्सरसाइज की कमी और रोजमर्रा की जिंदगी में बढ़ता तनाव मानसिक स्वास्थ्य
को खराब कर रहा है। शोध बताता है कि पौष्टिक आहार लेने भर से ही अवसाद में 25 से 30 प्रतिशत तक की कमी
आ सकती है। रोज की आदतों में भी बदलाव कर मानसिक स्वास्थ्य को अच्छा रखा जा सकता है।
विज्ञान आधारित 4 बदलाव जो स्वयं में लाएं
1) सोशल मीडिया छोड़ दें:स्वीकारें यह एक लत की तरह है
साइक्रियाटिक न्यूज के अनुसार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के अधिक उपयोग से डिप्रेशन बढ़ता है।
टीनएजर्स में यह आत्मसम्मान कमजोर करता है।
क्या करें: अधिकतर फोन की सेटिंग में डिजिटल बेलबीइंग एंड पैरेंटल कंट्रोल विकल्प होता है। इससे स्क्रीन
टाइम जान सकते हैं। उपयोग घटाने के लिए नोटिफिकेशन को बंद रखें। जरूरी पोस्ट पर ही रेस्पॉन्ड करें।
टाइम लिमिट तय करें। बाहरी दवाव के लिए दोस्त की मदद ले सकते हैं।
2) व्यायाम शुरू करें : 30 मिनट की वॉक भी चमत्कारी
हार्वर्ड के अनुसार निष्क्रिय जीवन शैली से मानसिक स्वास्थ्य तेजी से बिगड़ता है।
क्या करें : रोज 30 मिनट वॉक करें। 15 मिनट की साइकिलिंग भी कारगर है। इससे फील गुड हार्मोन एंडॉर्फिन
रिलीज होता है।
3) तनाव न लें: क्योंकि इससे कुछ भी नहीं बदलेगा
वेबएमडी के अनुसार तनाव में स्ट्रेस हार्मोन रिलीज होते हैं, जो भावनाओं को नियंत्रित करने वाले मस्तिष्क को
प्रभावित करते हैं।
क्या करें: जब भी तनाव हो वॉक करें। प्रतिदिन 10 से 15 मिनट डीप ब्रीदिंग करें।
4) पॉश्चर सही रखें : वरना मानसिक ऊर्जा घट जाएगी
हार्वर्ड के अनुसार जब झुक कर बैठते हैं तो टेस्टोस्टेरोन हार्मोन में वृद्धि होती है। इससे आत्मविश्वास कमजोर
होता है।
क्या करें: हर 25 मिनट में सीट से उठ जाएं। पॉश्चर को मदद मिलेगी। रक्त प्रवाह बढ़ेगा। कुर्सी पर बैठते समय
पैरों को फर्श पर रखें। उन्हें क्रॉस करके न बैठे।
अगर उदास हैं तो 'सैड डे' मनाएं
• The New York Times
हार्वर्ड मेडिकल स्कूल में मनोचिकित्सक डॉ. नताली सी डैटिलो कहती हैं कि जब आपका मन ठीक न हो या आप
खुद को दुखी महसूस करें तो इसके लिए ब्रेक जरूर लें। इसका मतलब है कि आपके शरीर को आराम की जरूरत है,
मस्तिष्क को ब्रेक की। जव लगे कि प्रोडक्टिविटी घट रही है, मूड ठीक नहीं है। कंसंट्रेशन कमजोर हो रहा है या
चिड़चिड़ाहट हो रही है तो आप 'सैड डे' मना सकते हैं। पर आप इस दिन करेंगे क्या? क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट
एंड्रयू कुलर कहते हैं कि इस बात पर विचार करें कि ऐसा क्यों हो रहा है। वर्कलोड ज्यादा है। किसी व्यक्ति की
वजह से ऐसा हो रहा है। यदि ऐसा है तो उसे ठीक कैसे करें इस पर काम करें। छुट्टी का यह दिन मैसेज पढ़ने और
खुद को दुखी करने पर बिल्कुल भी खर्च न करें।
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