Pan card -1

PAN card is your identity in financial transactions

Hi! Guys..we are back with new episodes.We will talking about PAN CARD and various topics related to it in this given new series.
 

सुप्रीम कोर्ट                     
pan-card
के आदेश के
मुताबिक इनकम
टेक्स रिटर्न
फाइलिंग के दौरान
आपका आधार
कार्ड, पैन कार्ड
के साथ लिंक
होना जरूरी है।
ऐसा नहीं होने की
सूरत में आपका
आईटीआर प्रोसेस
नहीं होगा।
सरकारी कामकाज का तरीका बदल गया है।
जगह-जगह आपको दस्तावेज दिखाने पड़ते
हैं। इसमें सबसे जरूरी है पैन कार्ड। जिस
तरह आधार कार्ड आपके लिए जरूरी है, उसी
तरह पैन कार्ड भी बहुत जरूरी है। PAN
यानी परमानेट अकाउंट नंबर वाला यह कार्ड
आपके वित्तीय लेन-देन और आईडी प्रूफ के
तौर पर बड़ी भूमिका निभाता है। जब बड़ी
राशि का लेन-देन होता है तो लेने और देने
वाला इसका एक रिकॉर्ड रखता है जो वर्तमान
में बगैर पैन कार्ड के संभव नहीं। आपके
इस अकाउंट नंबर के माध्यम से सरकार के
पास भी रिकॉर्ड रहता है कि आप आयकर
अदा की हुई राशि से ही लेन-देन कर रहे हैं।
बड़े ट्रांजेक्शन में पैन कार्ड नंबर दर्ज होने से
आपसे कोई पूछताछ नहीं होगी।

   पैने या स्थायी खाता संख्या 10 अंकों वाला
एक अल्फान्यूमेरिक पहचान संख्या है, जिसे
आयकर विभाग जारी करता है। अगर आपने
दो पैन बनवाए हैं तो आपके ऊपर आयकर
अधिनियम 1961 की धारा 272-बी के तहत
10000 रुपए का शुल्क लगाया जा सकता है।
आयकर विभाग के अनुसार, पैन कार्ड के लिए
ऑनलाइन आवेदन एनएसडीएल (नेशनल     
सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड) और     
यूटीआईटीएसएल (यूटीआई इन्फ्रास्ट्रक्चर     
टेक्नोलॉजी एंड सर्विसेज लि.) की वेबसाइट
के जरिये किए जा सकते हैं । पैन कार्ड बनाने   
के लिए कई बार आपको चक्कर काटने पड़ते
हैं और सरकार द्वारा तय शुल्क से ज्यादा खर्च
करना पड़ता है।

 

pan-card


       इसलिए जरूरी है पैन कार्ड 

⧭  विदेशी मुद्रा का लेन-देन करते समय,       
     टेलिफोन के लिए आवेदन करते समय,
⧭  बैंक अकाउंट खोलने, टैक्स का भुगतान,
     टीडीएस कटौती से लेकर 5 लाख या
     उससे अधिक की अचल संपत्ति खरीदने
     तक पैन जरूरी है। पैन के जरिये करदाता
     अपने लेन-देन को लिंक कर सकता है।
⧭  किसी वित्तीय संस्थान में टाइम डिपॉजिट
     या फिक्स्ड डिपॉजिट 50,000 रुपए से
     अधिक की धनराशि जमा कराने की सूरत
     में, वहीं पोस्ट ऑफिस के सेविंग अकाउंट
    'में भी 50,000 से अधिक की नकदी जमा
     कराने पर पैन का उल्लेख करना होता है।
⧭  होटल एवं रेस्तरां में 25,000 रु. से अधिक
    के बिल के लिए भी यह अनिवार्य है।
⧭ आयकर विभाग के मुताबिक बैंक ड्राफ्ट
    की नकद खरीद, पे ऑर्डर या एक दिन में
    50,000 या उससे अधिक के बैंकर्स चेक
    के लिए भी पैन लगता है।
⧭  क्रेडिट एवं डेबिट कार्ड प्राप्त करने के
     लिए भी यह जरूरी है।
⧭  एक लाख से अधिक कीमत वाली
     सिक्योरिटी की खरीद और म्यूचुअल
    फंड्स यूनिट्स की खरीद पर किए जाने
    वाले 50,000 रुपए या इससे अधिक के
    भुगतान पर भी पैन कार्ड की जानकारी
   देनी होती है।
⧭ आप किसी कंपनी के डिबेंचर या बॉण्ड
    खरीदने के लिए भी इतना ही पेमेंट कर रहे
    हैं तो भी यह जरूरी है।

                Thanks for visiting!!! Stay tuned for more information....

ALSO READ :- https://gyannology.blogspot.com/2020/05/fire-prevention-tips-insight-info.html



*Note:- Given information as per government regulations&act, all numeric value can be change as per income tax act.(income tax's rules&regulation slab change every year.)

Fire Prevention tips: insight info

First save yourself from fire and then help others

Fire-Prevention-tips

Somewhere caught fire        
And you
Stuck on location
So instead of panicking
Be patient. from all
First any clothes
Wet your
Nose and mouth cover
Take it.Then on the ground
Lie down, smoke not
goes in your breath,that
Will penetrate because the
Smoke always rises up


Often seen in cases of fire Is that less people die by burning
But more people than stampede or suffocation Are killed or injured. 
Children and women are more prey in. Be seen
So here we have a not special care and noticed for fire safety.
Mostly builder Considering it to be an unnecessary expense, cheap and low
Installing quality fire extinguishers show off does it. In some big buildings
Fire safety arrangements are good,
But over time they also start to deteriorate.
If there is an accident in this situation, then the fire 
It becomes difficult to achieve under control. First of all on fire
Protect yourself, then neighbors and others help people. First time of fire
The defense is to remove your handkerchief
And tie it wetly on the nose and mouth,
Carbon will not go in your breath. The smoke
Can make you unconscious and even kill can. 
If someone faints from smoke
Immediately take them to a ventilated place.

Emergency number can be dialed even without network

 Remember, in any crisis all of the country
 Emergency calling in states (Emergency
 Call) to dial 112. this number
 Dial even when mobile is not networked can be done.
 Emergency call through 112 number,100 of where   you are Reaches the number. Hence the fire brigade,
 Need ambulance, police or any other assistance
 So 112 number will help you. You Always remember    the 101,102,112 number. 

It is important to keep these things in mind

➽If there is a fire in the cylinder then a
Soak the sheet cloth in water and place it on the cylinder
Wrap it up. This will extinguish the fire immediately and
The big accident will be averted.
➽Fire extinguisher Should be check 2 times 
 in a year that they are working.
With this, all the residents of the building
Measures to avoid fire by Demonstration Should be told.
➽ Fire brigade takes some time to reach.
 If you have all trained, then
In time, you will be able to save yourself,
Will also be able to help others.

➽Every person, Training of basic life support should take. 
This makes you in difficult circumstances
Will be able to save himself and others.
➽Open all windows first
Turn off the regulator of the cylinder.
➽In every residential, commercial building
Back or forth to exit
There should be additional stairs.
➽Cold water of a person burnt by fire and
Treat with wet cloths, but ice do not apply.
 Apply a dry dressing on the wound then
Take us to the hospital. If burnt
If there is a wound by electric, go to the hospital immediately.

पहले स्वयं को आग से बचाएं फिर अन्य की मदद करें 

कहीं आग लग गई 

Fire-Prevention-tips
है और आप उस 

स्थान पर फंस गए हैं 

तो घबराने के बजाय

संयम बरतें। सबसे
पहले किसी कपड़े
को गीला कर अपनी
नाक और मुंह ढंक
लें। फिर जमीन पर
लेट जाएं, इससे धुआं
आपकी सांस में नहीं
घुसेगा, क्योंकि धुआं
हमेशा ऊपर उठता है।


अग्निकांड के मामलों में अक्सर देखा जाता
है कि जलने से तो कम लोगों की जान जाती
है, पर भगदड़ या दम घुटने से ज्यादा लोग
मारे जाते हैं या घायल हो जाते हैं। इनमें बच्चे
तथा महिलाएं ज्यादा शिकार होते हैं। देखा जाए
तो हमारे यहां फायर सेफ्टी के लिए विशेष
ध्यान नहीं दिया जाता है। ज्यादातर बिल्डर
इसे अनावश्यक खर्च समझकर सस्ते व कम
गुणवत्ता वाले आग बुझाने के उपकरण लगाकर
खानापूर्ति कर देते हैं। कुछ बड़ी इमारतों में
फायर सेफ्टी के इंतजामात अच्छे होते हैं,
लेकिन समय के साथ वे भी खराब होने लगते
हैं। ऐसे में हादसा हो जाए तो आग पर काबू
पाना कठिन हो जाता है। आग लगने पर पहले
खुद को सुरक्षित करें, फिर पड़ोसियों व अन्य
लोगों की मदद करें। अग्निकांड के समय पहला
बचाव यह होता है कि अपना रूमाल निकालें
और गीला कर नाक-मुंह पर बांध लें, इससे
आपकी सांस में कार्बन नहीं जाएगा। धुआं
आपको बेहोश कर सकता है और जान भी ले
सकता है। यदि कोई धुएं से बेहोश हो जाए तो
तुरंत उसे हवादार जगह पर ले जाऐं।

बगैर नेटवर्क के भी डायल कर सकते हैं इमरजेंसी नंबर
याद रखें, किसी भी संकट के समय देश के सभी 
 राज्यों में आपातकालीन फोन करने (इमरजेंसी 
कॉल) के लिए 112 नंबर डायल करें। यह नंबर 
 मोबाइल में नेटवर्क नहीं होने पर भी डायल 
किया जा सकता है। 112 नंबर के माध्यम से 
आपातकालीन कॉल आप जहां हैं, वहां के 100
 नंबर पर पहुंचती है। इसलिए फायर ब्रिगेड,
 एम्बुलेंस, पुलिस या अन्य कोई सहायता चाहिए
 तो 112 नंबर आपकी मदद करेगा। आप 101,
 102,112 नंबर हमेशा याद रखें।

इन बातों का ध्यान रखना जरूरी है
➽यदि सिलेंडर में आग लग जाए तो एक
चादर पानी में भिगोएं और उसे सिलेंडर पर
लपेट दें। इससे आग तुरंत बुझ ज़ाएगी और
बड़ा हादसा टल ज़ाएगा।
➽आग बुझाने वाले सभी यंत्रों को वर्ष में दो
बार चेक करना चाहिए कि वे काम कर रहें
हैं। इसी के साथ भवन के सभी रहवासियों
को डेमॉस्ट्रेशन द्वारा आग से बचने के उपाय
बताना चाहिए।
➽फायर ब्रिगेड को पहुंचने में कुछ वक्त लगता
है। आप सभी प्रशिक्षण ले चुके हैं तो ऐसे
समय में आप खुद को तो बचा सकेंगे,
दूसरों की मदद भी कर सकेंगे।
➽हर व्यक्ति बेसिक लाइफ सपोर्ट की ट्रेनिंग
ले। इससे कठिन परिस्थितियों में भी आप
खुद को तथा अन्य लोगों को बचा सकेंगे।
➽सबसे पहले सभी खिड़कियां खोल दें
सिलेंडर का रेगुलेटर बंद कर दें।
➽हर एक रेसीडेंशियल, कमर्शियल भवन में
बाहर निकलने के लिए पीछे या आजू-बाजू
अतिरिक्त सीढ़ियां होनी चाहिए।
➽आग से जले व्यक्ति का ठंडे पानी तथा
गीले कृपड़े से उपचार करें, लेकिन बर्फT
न लगाएं। घाव पर सूखा ड्रेसिंग करें फिर
अस्पताल ले जाएं। यदि बिजली से जले का
घाव है तो तुरंत अस्पताल ले जाएं।

ALSO READ :- https://gyannology.blogspot.com/2020/05/insight-view-about-vehicle-registration.html

                          THANKS FOR VISITING   



Insight view about Vehicle Registration-3

Unique code is in the high security number plate


RTO-vehicle-registration


Vehicles in RTO
There are several categories of.
Like which vehicles
Transport vehicle
And which non
Transport vehicle
Will be considered Similarly,
 the tax rate is different on vehicles used for transport,
different on non-transport vehicles.


If you have a VIP or special number from RTO (Such as 0001 or 7777 or 9999). Then the RTO charges you extra for that Does. This fee is five to ten thousand to lakhs of rupees Can be up to. It depends on Which special number do you want to allocate? As per terms of RTO,white number plate is used for non commercial private vehicles and for transportation purpose vehicle, A yellow number plate has been allocated. Now high security registration number plate on every vehicle Has made it necessary to install by RTO. This number plate protects you and the facility is designed keeping in mind. In Delhi Now the new vehicles are being registered, they are only high security number plates are available. This leads to Will help prevent accidents, because this chromium hologram 7 digits in the high security registration plate There is also a laser unique code which cann't be easily removed or Will not be erased. Laser number determines Is the plate real or fake. Through it any Vehicle and in case of accident or criminal incident All information about its owner is available. With these plates imported from Germany and Japan It is not possible to do artwork or change after getting it installed.

Specification of High security number plate

The RTO issues it. this Made of aluminum. this The hologram will be a circle. This hologram will be a sticker on which Vehicle's chassis number Will be indicated. It will not be destroyed.
➤The plate will have a snap lock system. It will be a kind of pin that Your High Security Registration Will attach the plate to your vehicle. This plate was installed by RTO. Screw driver or from any tools it Cannot be opened,  It helps in catching the criminals
➤Due to special plates, the vehicle is monitored through the camera at night It is possible to keep. This plate's numbers even tampering is not possible.
➤Placing such plates across the country All engines including chassis number
Unique information will be recorded in the national database so that vehicles from all over the country Has a centralized record of.
➤Incident, vehicle burns Nevertheless, the embossed letters on this plate Can be guessed by touching what is his registration number.
➤If you want to get This plate on older vehicles  Let's go to RTO in your city. Plate in 48 hours Will get it. Fee of 125-150 rupees for vehicles and For four wheelers and heavy vehicles 250-350 rupees.
➤GPS based in this plate there is a chip  With the help of police control room or
Regional Transport Office Anytime Can track any car is. To avoid duplicate plate It includes laser mark and hologram such as Safety measures have been used.

{IN HINDI}:-

आरटीओ में वाहनों की कई श्रेणियां हैं।
जैसे कौन से वाहन ट्रांसपोर्ट् व्हीकल
और कौन से नॉन ट्रांस्पोर्ट व्हीकल
माने जाएंगे। इसी तरह परिवहन के
काम आने वाले वाहनों पर टैक्स
दर अलग होती है, नॉन ट्रांस्पोर्ट वहीकल पर अलग।


यदि आप आरटीओ से कोई वीआईपी या स्पेशल नंबर
लेना चाहते हैं (जैसे कि 0001 या 7777 अथवा 9999).
तो उसके लिए आरटीओ आपसे अतिरिक्त शुल्क वसूल
करता है। यह शुल्क पांच-दस हजार से लेकर लाखों रुपए
तक हो सकता है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि
आप कौन सा स्पेशल नंबर आवंटित करवाना चाहते हैं।
आरटीओ नियम के अनुसार नॉन कमर्शियल प्राइवेट वाहनों
पर सफेद तथा परिवहन के उपयोग में वाले वाहनों के लिए
पीले रंग की नंबर प्लेट आवंटित की गई है। आरटीओ ने
अब हर वाहन पर हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन नंबर प्लेट
लगाना जरूरी कर दिया है। यह नंबर प्लेट आपकी सुरक्षा
और सुविधा को ध्यान में रखकर बनाई गई है। दिल्ली में
अब जिन नई गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन हो रहा है, उन्हें हाई
सिक्योरिटी नंबर प्लेट ही मिल रही हैं। इससे वारदात तथा
हादसे रोकने में मदद मिलेगी, क्योंकि इस क्रोमियम होलोग्राम
वाले हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट में 7 डिजिट का
लेजर यूनिक कोड भी होता है, जिसे आसानी से हटाया या
मिटाया नहीं जा सकेगा। लेजर नंबर यह निर्धारित करता
है कि प्लेट असली है या नकली। इसके जरिये किसी भी
हादसे या आपराधिक वारदात होने की स्थिति में वाहन और
इसके मालिक के बारे में तमाम जानकारियां उपलब्ध हो।
जाती हैं। जर्मनी और जापान से आयातित इन प्लेटों के साथ
कलाकारी करना या लगवाने के बाद बदलना संभव नहीं।


specification of high security number plate

➤इसे आरटीओ जारी करता है। यह एल्युमीनियम की बनी होती है। इस
पर बने होलोग्राम पर एक चक्र होगा। यह होलोग्राम एक स्टीकर होगा जिस
पर वाहन का इंजन-चेसिस नंबर इंगित रहेगा। यह नष्ट नहीं होगा।
➤प्लेट में स्नैप लॉक सिस्टम होगा। यह एक तरह का पिन होगा जो कि
आपके हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट को आपके वाहन से जोड़ेगा।
इस प्लेट को आरटीओ द्वारा लगाया जाता है। इसे स्क्रू ड्राईवर या पाने से
खोला नहीं जा सकता। अपराधियों को पकड़ने में इससे मदद मिलती है।
➤विशेष प्लेट होने के कारण रात में कैमरे के जरिये वाहन पर नजर
रखना संभव है। इस प्लेट के नंबरों से छेड़छाड़ भी संभव नहीं।
➤देशभर में ऐसी प्लेट लगाई जाने पर इंजन, चेसिस नंबर सहित तमाम
यूनिक जानकारियां नेशनल डाटाबेस में दर्ज रहेंगी ताकि पूरे देश के वाहनों
का एक सेंट्रलाइज्ड रिकॉर्ड रहे।
➤ हादसा हो जाए, वाहन जल जाए तो भी इस प्लेट पर उभरे हुए अक्षरों
को छूकर अंदाजा लगाया जा सकेगा कि उसका रजिस्ट्रेशन नंबर क्या है।
➤पुराने वाहनों पर यह प्लेट लगवाना चाहते हैं तो आपके शहर
के आरटीओ जाएं। 48 घंटे में प्लेट मिल जाएगी। इसका शुल्क
वाहनों के लिए 125-150 रुपए और चार पहिया व भारी वाहनों के लिए
250-350 रुपए तक है।
➤ इस प्लेट में जीपीएस आधारित
एक चिप लगी होती है, जिसकी मदद से पुलिस कंट्रोल रूम अथवा
क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय कभी भी किसी भी गाड़ी को ट्रैक कर सकता
है। डुप्लीकेट प्लेट से बचने के लिए इसमें लेजर मार्क और होलोग्राम जैसे
सुरक्षा उपाय इस्तेमाल किए गए हैं।


                           
                          https://gyannology.blogspot.com/2020/05/insight-info-about-vehicle-registration.html

Insight Info about Vehicle Registration-2

Third party insurance is beneficial along with first 



Insight-Info-about-Vehicle-Registration
                                          

जब आप लोन लेकर कोई भी वाहन खरीदते हैं तो आपका वाहन आपके नाम तथा फाइनेंस कंपनी के नाम के साथ आरटीओ में पंजीकृत होता है।आरसी बुक में इसकी डिटेल दर्ज की हुई रहती है।


कुछ लोग नकद में पूरा भुगतान करके तो कुछ लोग लोन लेकर वाहन खरीदते हैं। लोन
देने के लिए कई एजेंसियां, कंपनियां, प्राइवेट संस्थाएं उपलब्ध हैं। इन सभी का इंटरेस्ट रेट
अलग-अलग होता है। प्राइवेट संस्थाएं ज्यादा ब्याज वसूलती हैं। आपने लोन की राशि से
वाहन लिया है, इसकी जानकारी आरटीओ में दर्ज रहती है। नियम के अनुसार जब तक
आपके वाहन पर लोन की राशि बाकी रहती है, आपके अलावा आपका फाइनेंसर भी
आपके वाहन का बराबरी का मालिक माना जाता है। यही कारण है कि कुछ किस्तें चूकने
पर फाइनेंसर नियमों का हवाला देकर आपका वाहन जब्त कर लेता है। इसके बाद बकाया
किस्तें जमा करने पर वाहन लौटा देता है। यही बात सरकारी बैंक से लोन लेने पर भी
लागू होती है। किस्तें बकाया रहने पर बैंक भी वाहन जब्त कर लेते हैं। जब आप लोन
की राशि चुका देते हैं तो लोन देने वाली संस्था से नो ड्यूज सर्टिफिकेट लेना कभी न
भूलें। इस सर्टिफिकेट को आरटीओ में जमा कराकर रजिस्ट्रेशन बुक से लोन खत्म होने
की जानकारी दर्ज कराना जरूरी होता है। नो ड्यूज की एक कॉपी अपने पास जरूर रखें।
यह कॉपी आपको अपना पक्ष रखने के काम आएगी। लोन खत्म होने तक एक तरह से
आपका वाहन फाइनेंसर के पास गिरवी रहता है। रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया के साथ ही वाहन बीमा
करा लेना उचित रहता है। कुछ लोग फर्स्ट पारटी कुछ सिर्फ थर्ड पार्टी बीमा ही करवाते हैं।

अपने वाहन का बीमा जरूर कराएं
जब वाहन रजिस्ट्रेशन के समय ही इंशुरेंस
भी करवा लेना चाहिए। वाहन बीमा में
तीन पक्ष होते हैं। पहले आप, दूसरा
बीमा कंपनी और तीसरा वह जिसे आपके वाहन
से नुकसान पहुंचता है। फर्स्ट पार्टी बीमा में
वाहन दुर्घटना पर आपको क्लेम मिलता है
(इसमें शर्ते लागू रहती हैं)। थर्ड पार्टी बीमा
में 15 लाख का रुपए का आपका व्यक्तिगत
दुर्घटना बीमा भी कवर हो जाता है।
हर तरह की हानि से बचाव
यदि आप ये दोनों साथ कराते हैं तो इसके
कई लाभ हैं। जैसे- आपकी गाड़ी से दूसरे
व्यक्ति को नुकसान पहुंचने पर बीमा कंपनी
उसे हर्जाना देगी। आपकी गाड़ी से दूसरे
की गाड़ी या संपत्ति को नुकसान पहुचने पर
कंपनी हर्जाना देती है। कोर्ट केस होने पर
वकील व मुकदमे के खर्च से आप बच जाते
हैं। आपको चोट पहुंचने पर मुफ्त इलाज,
विकलांग होने पर मुआवजा, वाहन मालिक
की मौत पर आर्थिक मुआवजा मिलता है।
ऐसे मिलेगा वाहन नंबर
सभी जरूरी दस्तावेज आरटीओ में
जमा करवा दें। साथ ही जो भी शुल्क
लगता है, उसका भुगतान कर दें। इसके
बाद दो-तीन दिन में प्रक्रिया पूरी हो
जाती है और आरटीओ से आपको
नंबर आवंटित कर दिया जाता है।
लेकिन कुछ मामलों में सप्ताहभर तक
का समय लग जाता है। उस नंबर
को वाहन की प्लेट पर दर्ज करा लें।
यदि आपको यह सब काम करने में
असुविधा लगे तो किसी एजेंट की
सेवाएं ले सकते हैं।

Dealers also has powers to register vehicles

ड्राइविंग लाइसेस, रजिस्ट्रेशन , बीमा तथा प्रदूषण
नियंत्रणं का प्रमाण - पत्र साथ लेकर चलने की
अब जरूरत नहीं। आप इन्हें अपने डिजीलॉकर में रख
सकते हैं। पुलिस दस्तावेज मांगे तो
मोबाइल में इन्हें दिखा सकते हैं।


आजकल सरकार ने मोटर वाहन के डीलर्स को भी वाहनों के पंजीकरण
और वितरण के लिए मामूली शक्तियां दे रखी हैं। इसी के चलते डीलर द्वारा
आपको अस्थाई रजिस्ट्रेशन नंबर दिया जाता है। इसे अस्थाई नंबर प्लेट
भी कह सकते हैं। इसकी मियाद करीब 30 दिन होती है। इस नंबर प्लेट को
देख ट्रैफिक पुलिस समझ जाती है कि इसके पंजीकरण की प्रोसेज चल रही
होगी अस्थायी पंजीकरण के दौरान भी आपको फॉर्म-20 (आवेदन),
21 (बिक्री का प्रमाण) तथा 22 (सड़क योग्यता प्रमाण-पत्र, वैध
बीमा, बिजली बिल या राशनकार्ड, फॉर्म - 60, 61) के साथ पैनकार्ड की
कॉपी देना जरूरी होता है। शुल्क की जानकारी आपको आरटीओ से मिलेगी।
पंजीकरण तथा इंशुरेंस विषय को लेकर आपके मन में सवाल उठ
सकते हैं। कुछ का जवाब हम यहां दे रहे हैं-

अकसर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रीमियम का निर्धारण कैसे होता है?
कई कारक हैं जो प्रीमियम निर्धारित करते हैं।
विभिन्न बीमा कंपनियां समान कवरेज के लिए
अलग-अलग प्रीमियम वसूलती हैं। वाहन का
मॉडल, मेक, फ्यूल टाइप, क्यूबिक क्षमता, किस
उद्देश्य से और कितने वर्ष से वापर रहे हैं आदि।
इसके अलावा- नो-क्लेम बोनस, स्थान, ड्राइवर
की उम्र, अनुभव, जेंडर, वैवाहिक स्थिति और
चालक की पृष्ठभूमि भी मायने रखती है।
मिलने वाला क्लेम मेरे लिए पर्याप्त है?
- थर्ड पार्टी इंशुरेंस में तीसरे पक्ष की संपत्ति की
क्षति पर 7 लाख 50 हजार रु. तक। बीमित व्यक्ति
के पास थर्ड पार्टी प्रॉपर्टी नुकसान का कवरेज 6
हजार रु. तक सीमित रखने का विकल्प है।
गैस किट लगाने पर सुचित करना चाहिए?
-जी हां। जहां वाहन पंजीकृत है, वहां के आरटीओ
को सूचित करना चाहिए ताकि वे रजिस्ट्रेशन
रिकॉर्ड में यह दर्ज कर सकें। आपने बगैर गैस के
वाहन का प्रीमियत भरा है, इसलिए बीमा कंपनी
को भी सूचित करना पड़ेगा।
इंशुरेंस पॉलिसी की अवधि क्या है?
- पॉलिसी आमतौर पर एक वर्ष के लिए वैध
होती है। यदि 90 दिन तक प्रीमियम जमा नहीं
की तो एनबीसी(no bonus claim) का लाभ नहीं मिलेगा।
'नो क्लेम बोनस' क्या है?
बीमा अवधि खत्म होने तक किसी प्रकार
का दावा पेश नहीं किया तो आपको एनबीसी
का लाभ मिलता है। शर्तों के अनुसार यह 20
से लेकर 50% तक होता है। एक बात और,
वाहन ट्रांस्फर पर बीमा पॉलिसी नए मालिक को
हस्तांतरित हो सकती है, लेकिन एनसीबी नहीं।
पुरानी गाड़ी बेच आप नई लेते हैं तो अपनी
पुरानी एनसीबी का लाभ उठा सकते हैं।
डुप्लीकेट आरसी चाहिए तो क्या करें?
मूल रजिस्ट्रेशन गुम जाए, फट जाए, जल
जाए तो पुलिस तथा आरटीओ को सूचित करें।
आरटीओ से 'फॉर्म-26' मिलेगा जिसे भरने
के बाद निर्धारित शुल्क भी जमा करना पड़ेगा।
आरटीओ द्वारा मांगे गए दस्तावेज जमा करा दें,
तब आपको डुप्लीकेट आरसी जारी की जाएगी।





Facts about Vehicle Registration-1

Registration of new vehicle is valid for 15 years 

 
Facts-about-Vehicle-Registration

Driving any kind of vehicle without registering is a legal offense. Registration will reveal the identity of the vehicle owner, what is registration, what are the advantages and disadvantages, we will tell in this series.

When you get two or four wheeler from a dealer
If you buy a vehicle,
It is necessary to register its in RTO. Registration
At the time that this record is kept
Which date, year in which fuel run
Which vehicle is purchased. Motor Vehicle Act
According to this vehicle entered in your name
goes. One by the dealer at the time of vehicle purchase
Temporary number issued for a few days
Goes, so that you RTO in that period
To get permanent number from Motor vehicle
As per Section 39 of Act-1988
After purchasing any vehicle from the dealer, you
Cannot run it until
They do not get registered in RTO.

Functions of RTO: Regional Transport Office
That is, RTO, an organization of the Government of India
Which is the drivers for different states of the country
And maintaining database of vehicles
Does. Motor Vehicles Act-1988
Under each city and state vehicles Keep the activities running smoothly
There is a separate RTO for. In every state
It is headed by the Transport Commissioner. this
Central motor vehicle regulations and state motor
Enforces vehicle regulations. Driving
Conducting all types of driving tests
Issues licenses. Types of vehicles
Collects taxes and fees accordingly. Motor
Checks the validity of insurance of vehicles.
On vehicles running at a fixed speed
Keeps an eye Vehicle excise duty deposit
Does. Taxi, auto rickshaw drivers
Provides badges.
Registration- Certificate, Smart Card:A Registration certificate or RC is a document in which
It has been said that your vehicle is registered with Government of India. This your automotive
Documents proving registration of
serves as. When you buy new vehicle, then registration is valid it for 15 years. Renew after
Becomes necessary. Renewal is for five years
Remains valid. Likewise temporary registration
the certificate remains valid for one month, it
Cannot be renewed. Your RC book can be converted into a smart card.

Documents required for vehicle registration

★ Fill in the application form (Form No. -20). ★ Self Certificate (Form Number-21). This is given by the dealer / seller at the time of delivery of the vehicle. ★ Road Worthiness Certificate (Form Number-22). It is delivered by the manufacturer and handed over to the customer by the dealer while selling the vehicle. ★ Copy of insurance certificate. ★ Certificate of residence. ★ Your Identity Card. ★ Passport Size Photo. ★ Chassis & Engine Pencil Print

{IN HINDI :-}

बगैर पंजीकरण कराए किसी भी तरह का वाहन चलाना कानूनन जुर्म है ।
पंजीकरण से वाहन मालिक की पहचान पता चलती है।
पंजीकरण क्या है, फायदे और नुकसान क्या है, यह हम इस
सीरीज में बताएंगे। 

आप जब किसी डीलर से दो या चार पहिया
वाहन खरीदते हैं तो आरटीओ में उसका
पंजीयन कराना आवश्यक होता है। पंजीकरण
के समय यह रिकॉर्ड रखा जाता है कि आपने
किस तारीख, वर्ष में किस फ्यूल से चलने वाला
कौन सा वाहन खरीदा है। मोटर व्हीकल एक्ट
के अनुसार यह वाहन आपके नाम से दर्ज किया
जाता है। वाहन खरीद के समय डीलर द्वारा एक
टेम्परेरी नंबर कुछ दिन के लिए जारी किया
जाता है, ताकि आप उस अवधि में आरटीओ
से स्थायी नंबर प्राप्त कर सकें। मोटर वाहन
अधिनियम-1988 की धारा-39 के अनुसार
डीलर से कोई भी वाहन खरीदने के बाद आप
उसे तब तक नहीं चला सकते, जब तक कि
आरटीओ में उसका पंजीयन नहीं करा लेते।

आरटीओ के कार्यः क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय यानी आरटीओ भारत सरकार का एक संगठन
है जो देश के विभिन्न राज्यों के लिए ड्राइवरों और वाहनों का डेटाबेस बनाए रखने का काम
करता है। मोटर वाहन अधिनियम-1988 के तहत प्रत्येक शहर और राज्य के वाहनों की गतिविधियों को सुचारु रूप से चलाए रखने के लिए एक अलग आरटीओ है। हर राज्य में ट्रांसपोर्ट कमिश्नर इसका प्रमुख होता है। यह
केंद्रीय मोटर वाहनों के नियमों और राज्य मोटर वाहनों के नियमों को लागू करता है। ड्राइविंग
टेस्ट का संचालन कर सभी तरह के ड्राइविंग लाइसेंस जारी करता है। वाहनों के प्रकार के
अनुसार कर तथा शुल्क जमा करता है। मोटर वाहनों की बीमा की वैधता जांच करता है।
निर्धारित गति से तेज चलाने वाले वाहनों पर नजर रखता है। व्हीकल एक्साइज ड्टूटी जमा
करता है। टैक्सी, ऑटो रिक्शा चालकों को बैजेस प्रदान करता है।
पंजीकरण प्रमाण-पत्र, स्मार्ट कार्ड: पंजीकरण
प्रमाण-पत्र या आरसी एक दस्तावेज है, जिसमें
कहा गया है कि आपका वाहन भारत सरकार
के पास पंजीकृत है। यह आपके मोटर वाहन
के पंजीकरण को साबित करने वाले दस्तावेज
के रूप में कार्य करता है। जब आप नया वाहन
खरीदते हैं तो उसका पंजीयन 15 वर्ष के लिए
वैध होता है। इसके बाद नवीनीकरण कराना
जरूरी हो जाता है। नवीनीकरण पांच वर्ष के
लिए वैध रहता है। इसी तरह अस्थायी पंजीकरण
प्रमाण-पत्र एक महीने के लिए वैध रहता है, इसे
री-न्यू नहीं किया जा सकता। अपनी आरसी
बुक को स्मार्ट कार्ड में बदल सकते हैं।

वाहन पंजीकरण के लिए लगने वाले जरूरी दस्तावेज

★आवेदन-पत्र (फॉर्म नंबर-20) भरकर रखें। ★सेल्फ सर्टिफिकेट (फॉर्म नंबर-21)। यह डीलर / विक्रेता द्वारा वाहन की डिलीवरी के समय दिया जाता है। ★रोड वर्थनेस सर्टिफिकेट(फॉर्म नंबर-22)। यह निर्माता देता है और वाहन बेचते समय डीलर द्वारा ग्राहक को सौंप दिया जाता है। ★बीमा प्रमाण-पत्र की कॉपी। ★निवास का प्रमाण-पत्र। ★आपका पहचान- पत्र। ★पासपोर्ट साइज फोटो।  ★चेसिस एंड इंजन का पेंसिल प्रिंट

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