Insight Info about Vehicle Registration-2

Third party insurance is beneficial along with first 



Insight-Info-about-Vehicle-Registration
                                          

जब आप लोन लेकर कोई भी वाहन खरीदते हैं तो आपका वाहन आपके नाम तथा फाइनेंस कंपनी के नाम के साथ आरटीओ में पंजीकृत होता है।आरसी बुक में इसकी डिटेल दर्ज की हुई रहती है।


कुछ लोग नकद में पूरा भुगतान करके तो कुछ लोग लोन लेकर वाहन खरीदते हैं। लोन
देने के लिए कई एजेंसियां, कंपनियां, प्राइवेट संस्थाएं उपलब्ध हैं। इन सभी का इंटरेस्ट रेट
अलग-अलग होता है। प्राइवेट संस्थाएं ज्यादा ब्याज वसूलती हैं। आपने लोन की राशि से
वाहन लिया है, इसकी जानकारी आरटीओ में दर्ज रहती है। नियम के अनुसार जब तक
आपके वाहन पर लोन की राशि बाकी रहती है, आपके अलावा आपका फाइनेंसर भी
आपके वाहन का बराबरी का मालिक माना जाता है। यही कारण है कि कुछ किस्तें चूकने
पर फाइनेंसर नियमों का हवाला देकर आपका वाहन जब्त कर लेता है। इसके बाद बकाया
किस्तें जमा करने पर वाहन लौटा देता है। यही बात सरकारी बैंक से लोन लेने पर भी
लागू होती है। किस्तें बकाया रहने पर बैंक भी वाहन जब्त कर लेते हैं। जब आप लोन
की राशि चुका देते हैं तो लोन देने वाली संस्था से नो ड्यूज सर्टिफिकेट लेना कभी न
भूलें। इस सर्टिफिकेट को आरटीओ में जमा कराकर रजिस्ट्रेशन बुक से लोन खत्म होने
की जानकारी दर्ज कराना जरूरी होता है। नो ड्यूज की एक कॉपी अपने पास जरूर रखें।
यह कॉपी आपको अपना पक्ष रखने के काम आएगी। लोन खत्म होने तक एक तरह से
आपका वाहन फाइनेंसर के पास गिरवी रहता है। रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया के साथ ही वाहन बीमा
करा लेना उचित रहता है। कुछ लोग फर्स्ट पारटी कुछ सिर्फ थर्ड पार्टी बीमा ही करवाते हैं।

अपने वाहन का बीमा जरूर कराएं
जब वाहन रजिस्ट्रेशन के समय ही इंशुरेंस
भी करवा लेना चाहिए। वाहन बीमा में
तीन पक्ष होते हैं। पहले आप, दूसरा
बीमा कंपनी और तीसरा वह जिसे आपके वाहन
से नुकसान पहुंचता है। फर्स्ट पार्टी बीमा में
वाहन दुर्घटना पर आपको क्लेम मिलता है
(इसमें शर्ते लागू रहती हैं)। थर्ड पार्टी बीमा
में 15 लाख का रुपए का आपका व्यक्तिगत
दुर्घटना बीमा भी कवर हो जाता है।
हर तरह की हानि से बचाव
यदि आप ये दोनों साथ कराते हैं तो इसके
कई लाभ हैं। जैसे- आपकी गाड़ी से दूसरे
व्यक्ति को नुकसान पहुंचने पर बीमा कंपनी
उसे हर्जाना देगी। आपकी गाड़ी से दूसरे
की गाड़ी या संपत्ति को नुकसान पहुचने पर
कंपनी हर्जाना देती है। कोर्ट केस होने पर
वकील व मुकदमे के खर्च से आप बच जाते
हैं। आपको चोट पहुंचने पर मुफ्त इलाज,
विकलांग होने पर मुआवजा, वाहन मालिक
की मौत पर आर्थिक मुआवजा मिलता है।
ऐसे मिलेगा वाहन नंबर
सभी जरूरी दस्तावेज आरटीओ में
जमा करवा दें। साथ ही जो भी शुल्क
लगता है, उसका भुगतान कर दें। इसके
बाद दो-तीन दिन में प्रक्रिया पूरी हो
जाती है और आरटीओ से आपको
नंबर आवंटित कर दिया जाता है।
लेकिन कुछ मामलों में सप्ताहभर तक
का समय लग जाता है। उस नंबर
को वाहन की प्लेट पर दर्ज करा लें।
यदि आपको यह सब काम करने में
असुविधा लगे तो किसी एजेंट की
सेवाएं ले सकते हैं।

Dealers also has powers to register vehicles

ड्राइविंग लाइसेस, रजिस्ट्रेशन , बीमा तथा प्रदूषण
नियंत्रणं का प्रमाण - पत्र साथ लेकर चलने की
अब जरूरत नहीं। आप इन्हें अपने डिजीलॉकर में रख
सकते हैं। पुलिस दस्तावेज मांगे तो
मोबाइल में इन्हें दिखा सकते हैं।


आजकल सरकार ने मोटर वाहन के डीलर्स को भी वाहनों के पंजीकरण
और वितरण के लिए मामूली शक्तियां दे रखी हैं। इसी के चलते डीलर द्वारा
आपको अस्थाई रजिस्ट्रेशन नंबर दिया जाता है। इसे अस्थाई नंबर प्लेट
भी कह सकते हैं। इसकी मियाद करीब 30 दिन होती है। इस नंबर प्लेट को
देख ट्रैफिक पुलिस समझ जाती है कि इसके पंजीकरण की प्रोसेज चल रही
होगी अस्थायी पंजीकरण के दौरान भी आपको फॉर्म-20 (आवेदन),
21 (बिक्री का प्रमाण) तथा 22 (सड़क योग्यता प्रमाण-पत्र, वैध
बीमा, बिजली बिल या राशनकार्ड, फॉर्म - 60, 61) के साथ पैनकार्ड की
कॉपी देना जरूरी होता है। शुल्क की जानकारी आपको आरटीओ से मिलेगी।
पंजीकरण तथा इंशुरेंस विषय को लेकर आपके मन में सवाल उठ
सकते हैं। कुछ का जवाब हम यहां दे रहे हैं-

अकसर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रीमियम का निर्धारण कैसे होता है?
कई कारक हैं जो प्रीमियम निर्धारित करते हैं।
विभिन्न बीमा कंपनियां समान कवरेज के लिए
अलग-अलग प्रीमियम वसूलती हैं। वाहन का
मॉडल, मेक, फ्यूल टाइप, क्यूबिक क्षमता, किस
उद्देश्य से और कितने वर्ष से वापर रहे हैं आदि।
इसके अलावा- नो-क्लेम बोनस, स्थान, ड्राइवर
की उम्र, अनुभव, जेंडर, वैवाहिक स्थिति और
चालक की पृष्ठभूमि भी मायने रखती है।
मिलने वाला क्लेम मेरे लिए पर्याप्त है?
- थर्ड पार्टी इंशुरेंस में तीसरे पक्ष की संपत्ति की
क्षति पर 7 लाख 50 हजार रु. तक। बीमित व्यक्ति
के पास थर्ड पार्टी प्रॉपर्टी नुकसान का कवरेज 6
हजार रु. तक सीमित रखने का विकल्प है।
गैस किट लगाने पर सुचित करना चाहिए?
-जी हां। जहां वाहन पंजीकृत है, वहां के आरटीओ
को सूचित करना चाहिए ताकि वे रजिस्ट्रेशन
रिकॉर्ड में यह दर्ज कर सकें। आपने बगैर गैस के
वाहन का प्रीमियत भरा है, इसलिए बीमा कंपनी
को भी सूचित करना पड़ेगा।
इंशुरेंस पॉलिसी की अवधि क्या है?
- पॉलिसी आमतौर पर एक वर्ष के लिए वैध
होती है। यदि 90 दिन तक प्रीमियम जमा नहीं
की तो एनबीसी(no bonus claim) का लाभ नहीं मिलेगा।
'नो क्लेम बोनस' क्या है?
बीमा अवधि खत्म होने तक किसी प्रकार
का दावा पेश नहीं किया तो आपको एनबीसी
का लाभ मिलता है। शर्तों के अनुसार यह 20
से लेकर 50% तक होता है। एक बात और,
वाहन ट्रांस्फर पर बीमा पॉलिसी नए मालिक को
हस्तांतरित हो सकती है, लेकिन एनसीबी नहीं।
पुरानी गाड़ी बेच आप नई लेते हैं तो अपनी
पुरानी एनसीबी का लाभ उठा सकते हैं।
डुप्लीकेट आरसी चाहिए तो क्या करें?
मूल रजिस्ट्रेशन गुम जाए, फट जाए, जल
जाए तो पुलिस तथा आरटीओ को सूचित करें।
आरटीओ से 'फॉर्म-26' मिलेगा जिसे भरने
के बाद निर्धारित शुल्क भी जमा करना पड़ेगा।
आरटीओ द्वारा मांगे गए दस्तावेज जमा करा दें,
तब आपको डुप्लीकेट आरसी जारी की जाएगी।





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