LAST WILL & TESTAMENT-2 : All U hav to know about Wasiyat

पैतृक संपत्ति से कोई बेदखल नहीं कर सकता आपको 

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 इस सीरीज में हम आपको पैतृक या विरासत में मिली संपत्ति संबंधी जानकारी दे रहे हैं। कानूनन 

संपत्ति दो प्रकार की होती है, एक वो जो व्यक्ति ने अपनी मेहनत से अर्जित की हो यानी स्वअर्जित 

संपत्ति और दूसरी जो विरासत या उत्तराधिकार में मिली हो यानी पैतृक संपत्ति। स्वअर्जित संपत्ति

के लिए बनाई वसीयत से व्यक्ति चाहे तो अपने बच्चों तक को बेदखल कर सकता है। इसके विपरीत 

पैतृक संपत्ति से खानदान के किसी भी सदस्य को बेदखल नहीं कर सकते। चाहे उस संपत्ति की 

वसीयत बनाई गई हो या नहीं। वैसे बाप-दादा की संपत्ति के बंटवारे के लिए भी कई तरह के नियम-

कानून हैं, ये इतना सीधा मामला नहीं है।

रिश्तेदारों से अनापत्ति मिलने पर संपत्ति हस्तांतरित होगी

आमतौर पर पैतृक संपत्ति के बंटवारे की बात, संपत्ति मालिक की मृत्यु बाद ही की जाती है। क्योंकि 

उसके बाद ही नया मालिक बनाने की बात उठती है। अगर मरने वाले ने कोई वसीयत नहीं की थी,तो 

उसके पुत्र या उत्तराधिकारी के नाम वह संपत्ति कानूनन हस्तांतरित हो जाएगी। इसके लिए हक 

जताने वाले को कोर्ट में उत्तराधिकार प्रमाण-पत्र के लिए आवेदन करना होगा। यदि कोई रिश्तेदार 

हस्तांतरण पर आपत्ति जताता है तो आवेदन निरस्त हो जाता है। इसके बाद मामला कोर्ट में तबतक 

लंबा चलता है, जब तक कानूनन उत्तराधिकारी का फैसला न हो जाए अथवा सभी सदस्य एक मत 

से समझौता न कर लें।

 - पैतृक संपत्ति का क्या मतलब है?

सामान्यतः किसी भी पुरुष को अपने पिता, दादा या परदादा से उत्तराधिकार में प्राप्त संपत्ति, पैतृक 

संपत्ति कहलाती है। इस परिवार में जन्म के साथ ही बच्चा पिता की पैतृक संपत्ति का अधिकारी हो 

जाता है।

- परदादा की संपत्ति का मैं कैसे हकदार हूं?

उदाहरण के लिए- किसी परिवार में किसी व्यक्ति के तीन बच्चे हैं और उसने कोई वसीयत भी नहीं 

कराई है। ऐसे में उस व्यक्ति की मृत्यु के बाद उस पैतृक संपत्ति का बंटवारा उन तीनों बच्चों में 

होगा। इसके बाद तीसरी पीढ़ी के बच्चे कानूनी रूप से अपने पिता के हिस्से में से अपना हिस्सा लेने

के हकदार होंगे। इन तीनों बच्चों को पैतृक संपत्ति का एक-एक तिहाई मिलेगा और उनके बच्चों और 

पत्नी को बराबर-बराबर हिस्सा मिलेगा।

- पैतृक संपत्ति बेचने का अधिकार किसे है?

जब सभी सदस्यों को कानूनी रूप से उनका हिस्सा मिल जाता है तो वे उसे बेचने के हकदार भी हो 

जाते हैं। यदि बंटवारा नहीं हुआ है तो पैतृक संपत्ति बेचने के लिए हिस्सेदारों की लिखित सहमति 

लेना जरूरी होता है। उसके बाद ही इसे बेच सकते हैं।

बेटियों को भी वे हक मिले जो बेटों तक सीमित थे

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 पिता की वसीयत में शादीशुदा बेटी का कुंवारी बेटी जितना ही अधिकार है। यदि पिता की मौत 

2005 के बाद हुई है तो पुरखों की प्रॉपर्टी पर बेटी का दावा करने का पूरा हक बनता है, चाहे समय 

कितना भी बीत चुका हो।

 वसीयत विषय के इस भाग में हम 'बेटियों का संपत्ति में हिस्सा' पर बात करेंगे। पुराने कानून में 

बेटियों को पिता की वसीयत-संपत्ति में उत्तराधिकारी बनाने का प्रावधान नहीं था। लेकिन, 9 सितंबर 

2005 को 'हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम' में संशोधन कर बेटियों (कुंआरी-शादीशुदा) को भी बेटों के 

बराबर पारिवारिक संपत्ति अथवा वसीयत में भागीदार बनाने का हक दिया गया है। हां, यह बात 

अलग है कि कोई बेटी अपना हिस्सा लेने से मना कर दे। इतना ही नहीं, उसे पिता की वसीयत का 

प्रबंधक भी बनाया जा सकता है। हालांकि, बेटियों को यह लाभ तभी मिलेगा, जब पिता का निधन 9

सितंबर 2005 के बाद हुआ हो। ऐसा भी होता है कि बच्चे माता-पिता से दुर्व्यवहार करते हैं, उन्हें

खाना नहीं देते, देखभाल नहीं करते, इस स्थिति में माता-पिता को बच्चों से तुरंत घर खाली करा लेने 

का अधिकार कानून ने दिया है। वे बेटे-बेटियों को वसीयत से बेदखल कर सकते हैं। यही बात बेटी-

दामाद पर भी लागू होती है।

सामान्य तौर पर पूछे जाने वाले प्रश्नों के उत्तर

 प्रश्नः शादीशुदा बेटी कैसे हक जताएगी?

- 2005 में संपत्ति संबंधी कानून में संशोधन किया गया है। उसके अनुसार बेटी कुंआरी हो

या शादीशुदा, पिता की मौत के बाद वह भी उनकी संपत्ति में बराबरी की हिस्सेदार होगी।

प्रश्नः पिता ने वसीयत ही न बनाई हो तब?

- ऐसी स्थिति में भी परिवार के सभी सदस्यों (बेटियां भी) का संपत्ति में बराबरी का हिस्सा माना 

जाएगा। 'हिंदू उत्तराधिकार कानून' में पुरुष उत्तराधिकारियों को चार वर्गों में बांटा गया है। सबसे 

पहले प्रॉपर्टी क्लास- एक के उत्तराधिकारियों के पास जाती है।इनमें विधवा, बेटी और बेटे या अन्य 

शामिल हैं। इसका मतलब है पिता की संपत्ति में बेटी का बराबर हिस्सा।

प्रश्नः बेटी का जन्म या पिता की मौत 2005 से पहले हुई हो तो?

 - फर्क नहीं पड़ता कि बेटी का जन्म 9 सितंबर 2005 के बाद हुआ या उसके पहले। पिता की 

संपत्ति में बेटी का बेटे जितना अधिकार होगा। फिर वह चाहे पैतृक संपत्ति हो या सेल्फ ऑक्यूपाइड। 

पिता की मौत 2005 से पहले हुई है तो बेटी का पैतृक संपत्ति पर अधिकार नहीं होगा। सेल्फ-

ऑक्यूपाइड प्रॉपर्टी को पिता की वसीयत के अनुसार बांटा जाएगा।

प्रश्नः मां की मौत के बाद बेटी का नाना की संपत्ति पर हक होगा?

- नाना ने संपत्ति चाहे खुद के दम पर जुटाई हो या उन्हें विरासत में मिली हो, आपकी मां

और उनके भाई-बहन ही कानूनी रूप से उसे पाने के हकदार होंगे, आप नहीं।

बुरे बेहेवियर पर माता-पिता कर सकते हैं बच्चों को बेघर

 बुजुर्गों को कानून ने यह अधिकार दिया है कि बच्चे उनसे दुर्व्यवहार करें या फिर नौकर जैसा बर्ताव

करें तो माता-पिता चाहें तो बेटा-बेटी-दामाद या किसी और को अपने घर से निकाल सकते हैं।

 इस अंतिम भाग में हम आपको यह जानकारी देंगे कि कानून ने बुजुर्गों को यह अधिकार दिया है 

कि यदि बच्चे उनसे दुर्व्यवहार करें, समय पर ठीक भोजन न दें, उनसे नौकर जैसा बर्ताव करें तो 

माता-पिता बेटा-बेटी-दामाद या कोई और, सभी को अपने घर से निकाल सकते हैं। वसीयत से बेदखल 

कर सकते हैं। यदि वसीयत बच्चों के नाम कर दी है तो उसे बदलवाकर अपनी संपत्ति बच्चों से छीन 

सकते हैं।

एक उदाहरण देखिए- दिल्ली हाईकोर्ट ने 2016 में इसी तरह के एक मामले में आदेश सुनाया था कि 

बेटा केवल माता-पिता की मर्जी से ही उनके घर में रह सकता है। माता-पिता न चाहें तो उसे उनके 

घर में रहने का कानूनी हक नहीं है, भले ही उसकी शादी हुई हो या न हुई हो। इसी तरह दिल्ली का 

ही 2017 का एक केस है, जिसमें हाईकोर्ट ने एक अन्य फैसले में कहा गया था कि जिन बुजुर्गों के

बच्चे उनसे खराब व्यवहार करते हैं, वे किसी भी तरह की प्रॉपर्टी से, वसीयत से बच्चों को बेदखल 

कर सकते हैं। सिर्फ माता-पिता की कमाई से बनी संपत्ति पर ही यह बात लागू नहीं होती, बल्कि यह 

प्रॉपर्टी उनकी पैतृक और किराए की भी हो सकती है जो बुजुर्गों के कानूनी कब्जे में हो।

सामान्य तौर पर पूछे जाने वाले प्रश्नों के उत्तर

निकाले गए बच्चे वसीयत के हकदार होंगे?

- अपनी खुद की बनाई संपत्ति से ,माता-पिता बच्चे को बेदखल कर सकते हैं। जब तक वे न चाहें 

बच्चे हकदार नहीं होंगे। हां, उनकी मृत्यु बाद वे दावा कर सकते हैं, बशर्ते वे संपत्ति दान करके न 

मरे हों। लेकिन दादा-परदादा के उत्तराधिकार वाली संपत्ति के मामले में वे बच्चों को बेदखल नहीं कर 

सकते। 

☝ क्या दूसरी पत्नी के बच्चे वसीयत में हकदार हैं?

- हिंदू मैरिज एक्ट के तहत पहली पत्नी के रहते दूसरा विवाह वैध नहीं माना जाता। लेकिन, पहली 

पत्नी की मौत के बाद व्यक्ति दूसरी शादी करता है तो उसे वैध माना जाएगा। फिर उसके बच्चे

भी वसीयत में हकदार होंगे।

 ☝ वसीयत को चुनौती कैसे दें?

किसी परिवार में चार भाई हैं। एक भाई ने पिता की मृत्यु उपरांत अपनी मां से वसीयत के दस्तावेजों 

पर फर्जी हस्ताक्षर करवा लिए, तो आप उस वसीयत को कोर्ट में चुनौती दे सकते हैं। 

☝ हमें अपना हिस्सा कब नहीं मिल पाता?

- पिता ने जीवित रहते खुद खरीदी संपत्ति किसी को दे दी तो वारिसों को उसमें

हिस्सा नहीं मिलता। पिता की मौत के बाद भी वे हक नहीं जमा पाएंगे। हालांकि,

रजिस्ट्रेशन एक्ट के अनुसार, अचल संपत्ति का गिफ्ट डीड कराना जरूरी है।

यदि पिता ने इसे रजिस्टर्ड नहीं कराया है तो कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है।

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