LAST WILL AND TESTAMENT-1


वसीयत सिर्फ़ लिखें ही नहीं, उसे रजिस्टर्ड भी कराएं 

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वसीयत में विशेष रूप से व्यक्ति के विचारों और इच्छाओं का खुलासा होता  है,जिन्हें व्यक्ति खुद की मृत्यु के बाद पूरी होती देखना चाहता है। वसीयत  लिखने वाला व्यक्ति इसमें फेरबदल कर सकता है।

वे सभी लोग जिनके पास धन-संपत्ति है, वे वसीयत करा सकते हैं। वसीयत यानी 'विल

डाक्यूमेंट्स' एक ऐसा दस्तावेज है जो परिवार के सदस्यों के बीच संपत्ति के बंटवारे को

क्लीयर करता है। यह वसीयत इतनी पॉवरफुल होती है कि व्यक्ति के जीवित न रहने पर इसमें

लिखा सर्वोच्च अदालत भी मान्य करती है।

        वैसे देखा जाए तो हर व्यक्ति को वसीयतनामा तैयार करना चाहिए। ऐसा करने

से उसके न रहने पर परिवार में शांति बनी रहती है। पारिवारिक विवादों से बचने के

लिए 'विल' लिखना न केवल उत्तराधिकार  के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह 

न तो एजटिल प्रक्रिया है और न ही महंगी। इसलिए कानूनी तौर पर वसीयत लिखना 

हमेशा बुद्धिमानी का काम होता है, ताकि आपकी धन-संपत्ति आपकी इच्छा के अनुसार 

आपके वारिसों में बांटी जा सके। संपत्तियों के वितरण में विशेषज्ञों की जरूरत होती है, 

इसलिए कानूनी सलाह लेना फायदेमंद रहता है। वसीयत के कई प्रकार होते हैं

 वकील से बनवाना ठीक रहता है

वसीयत लिखने के लिए किसी वकील का होना जरूरी नहीं है। लेकिन, किसी वकील 

की मदद लेकर इसे तैयार करते हैं तो फर्जीवाड़े, गलतफहमी या धोखाधड़ी की 

आशंका कम हो जाती है। ऐसा करने से कोर्ट में वसीयत को गलत साबित करने की 

आशंका भी नहीं रहती। कानूनी तौर पर टाइप की हुई अथवा हाथ से लिखी गई, दोनों ही 

वसीयत मान्य हैं।

 वसीयत का रजिस्ट्रेशन जरूरी

आपकी लिखी वसीयत से छेड़छाड़ न हो, इससे बचने के लिए इसका रजिस्ट्रेशन करा

लेना चाहिए। इसके लिए रजिस्ट्रार या उप रजिस्ट्रार के पास जाएं। उनके बताए अनुसार

निर्धारित फीस भरें और रजिस्टर करा लें। इसके लिए आपको दो गवाहों की जरूरत

पड़ेगी। यह ध्यान रखें कि गवाह वे ही मान्य हैं, जो आपकी पहचान वाले हों, लेकिन उनका

आपकी वसीयत से कोई लेना-देना न हो।

              किस उम्र में लिखना चाहिए वसीयत 

 इसकी कोई उम्र निर्धारित नहीं है, लेकिन कानूनी रूप से जो भी व्यक्ति 21 वर्ष का हो

चुका हो, वह अपनी वसीयत बना सकता है। इसके अलावा, जिस व्यक्ति का दिमाग

ठीक हो, जो दुष्कर्म, धोखाधड़ी, बुरे आचरण, भ्रष्टाचार से मुक्त रहा हो। वैसे, कानूनी

सलाहकारों के अनुसार कम उम्र में वसीयत लिखने से आगे चलकर पारिवारिक विवाद

नहीं होते। इसके अलावा, वसीयत लिखना तभी ठीक रहता है, जब व्यक्ति के सभी अंग

ठीक से काम कर रहे होते हैं।

हर पन्ने पर स्वयं के तथा गवाहों के साइन जरुरी 

 

LAST-WILL-AND-TESTAMENT-WASIYAT

   वसीयत पर शॉर्टकट वाले नहीं, बल्कि पूरे दस्तखत करना चाहिए। यही नियम गवाहों पर भी लागू होता है। वसीयत पर    अपना असली नाम लिखना चाहिए,न कि घर में या दोस्तों में पुकारा जाने वाला उपनाम।

 वर्तमान आर्थिक स्थिति और वरीयताओं के अनुसार वसीयत को अपडेट कराते रहना

चाहिए। वसीयत बनाने के बाद आपने कोई संपत्ति या शेयर खरीदा है तो तारीख का

उल्लेख कर वसीयत अपडेट करना चाहिए। आपने जो वसीयत कराई थी, उससे कई गुना

संपत्ति बढ़ने की स्थिति में भी नवीनीकरण जरूरी है। ऐसा भी होता है कि दुर्भाग्य से

संपत्ति न रहे, घाटा हो जाए, व्यापार में हानि हो जाए तो ऐसी स्थिति में भी वसीयत तुरंत

अपडेट कराएं। आप जितनी भी बार वसीयत बदलें, हर बार रजिस्टर कराएं। यह उल्लेख

जरूर करें कि संपत्ति को मैत्रीपूर्ण तरीके से इच्छानुसार खुशी-खुशी बांटा गया है।

वसीयत का निश्चित प्रारूप नहीं है लेकिन धोखाधड़ी, फेरबदल या पृष्ठों की अदला-

बदली से बचने के लिए आपको यह जरूर सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि वसीयत के

सभी पृष्ठों को क्रमबद्ध तरीके से संख्याबद्ध किया गया हो और प्रत्येक पृष्ठ पर आपके

और गवाहों द्वारा हस्ताक्षर किया गया हो।

 • वसीयत के प्रकार : कानूनी रूप से देखा जाए तो वसीयत दो प्रकार की होती है। पहली विशेषाधिकार युक्त और दूसरी बिना विशेषाधिकार वाली। विशेषाधिकार वाली अनौपचारिक वसीयत होती है जिसे सिपाहियों, वायु सैनिकों, नौ-सैनिकों द्वारा बनाया जाता है। यह लिखित या मौखिक घोषणा पर अल्प समय के नोटिस द्वारा तैयार करवाई जाती है। इसके अलावा, अन्य सभी वसीयतों को विशेषाधिकार रहित वसीयत कहा जाता इसमें सभी तरह की औपचारिकताएं पूरी करना जरूरी होता है।

 • मौखिक वसीयत : कुछ सम्मानित लोगों या गवाहों की उपस्थिति में व्यक्ति मौखिक रूप से घोषणा करता है कि वह परिवार के किस सदस्य को संपत्ति का कितना हिस्सा देना चाहता है। यह मौखिक वसीयत कहलाती है। इसकी ज्यादा अहमियत नहीं होती। (भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम धारा-65 और 66 के तहत सिर्फ सुरक्षा सैनिकों की ही मौखित वसीयत मान्य होगी)।

 • म्यूचुअल वसीयत : जब दो व्यक्ति एक साथ एक समय में वसीयत बनाते हैं तो इसे म्यूचुअल वसीयत कहते हैं। जैसे कि पति-पत्नी अपनी संपत्ति एक-दूसरे के नाम कर दें। सामान्य वसीयत कई बार बदल सकते हैं, लेकिन म्यूचुअल वसीयत रजिस्टर होने के बाद बदली नहीं जा सकती।

 • सशर्त या आकस्मिक इच्छा वसीयत : यह कुछ शर्तों के साथ, अचानक बनाई गई वसीयत होतीहै।  • होलोग्राफ विल : इसे वसीयतकर्ता खुद अपने हाथ से लिखकर संपत्ति वितरण का उल्लेख करता है।

 • ऑफिशियल विल: यह एक अपमानित करवे वाली वसीयत भी कहलाती है। इसमें वसीयत करने वाला अपनी संपत्ति बच्चों, पत्नी और रिश्तेदारों को न देते हुए किसी अजनबी या संस्था के नाम कर देता है।

 • डुप्लिकेट विल : यह मूल वसीयत की फोटोकॉपी होती है, यानी उसकी नकल। 

वसीयत की वीडियोग्राफी आपको परेशानियों से बचाएगी 


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  वसीयत में संशोधन करते समय दोनों गवाहों को भी उपस्थित   रखना चाहिए। इससे उन्हें भी पता रहता है कि वसीयत में क्या फेरबदल किया है। व्यक्ति के न रहने पर ये गवाह वसीयतकर्ता   का पक्ष रख सकेंगे।

 वसीयत को किसी व्यक्ति द्वारा चुनौती देने की संभावना को ध्यान

में रखकर वसीयतकर्ता को अतिरिक्त सावधानी बरतना होगी। उसे 

विश्वसनीय सलाहकार के माध्यम से तैयार करवाएं। उच्च पद पर काम 

करने वाले दो गवाह रखें। लिखते समय वीडियोग्राफी करें। इसके बाद 

कानूनी रूप से वसीयत का पंजीयन करवाएं। अपने बैंक खातों, फिक्स्ड 

डिपॉजिट, शेयर, डीमैट अकाउंट, प्रोविडेंट फंड, म्यूचुअल फंड, 

अचल संपत्ति-जमीन-जायदाद आदि के संबंध में बनाए जाने वाले नॉमिनी 

सुनिश्चित करें। साफ-साफ लिखें कि किसे क्या दिया जाए। संपत्ति संबंधी

अधूरी जानकारी दर्ज करने से अक्सर कानूनी जटिलताएं उत्पन्न हो जाती हैं। 

फिर लाभार्थियों को न्यायालय से उत्तराधिकार प्रमाण-पत्र, प्राप्त करने 

के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

            सामान्य तौर पर पूछे जाने वाले प्रश्नों के उत्तर

 Q.वसीयत से तत्काल बेदखल किया जा सकता है?

-स्व-अर्जित संपत्ति से कोई व्यक्ति परिवार के सदस्यों को बेदखल कर सकता है। हालांकि, 

विरासत में मिली संपत्ति के मामले में कानूनी वारिस होने का फायदा सदस्यों को मिलता है।

Q.पंजीकृत विल को कोर्ट में चुनौती दे सकते है?

-हां। पंजीकृत वसीयत व मृतक की अपंजीकृत वसीयत को चुनौती दी जा सकती है। बताना होगा 

कि वसीयतकर्ता की दिमागी हालत ठीक नहीं थी। वसीयतकर्ता को जबरदस्ती, अनुचित प्रभावः 

डालकर, धोखाधड़ी, गलती, रिश्तों की दुर्भावना से अनदेखी कर या गलत बयानी कर. वसीयत बनवाई 

गई हो। लेकिन इन सबके सबूत दिखाने होंगे। 

Q.आकस्मिक लाभार्थी कौन हो सकते हैं?

-कोई व्यक्ति, संस्था या सरकार हो सकते हैं। यदि संपत्ति किसी के नाम नहीं की हों और व्यक्ति की मृत्यु हो जाए, कोई वारिस न हो, ऐसी स्थिति में पूरी संपत्ति सरकार के अधीन हो सकती है।

Q.गैर-लाभार्थी कौन हो सकते हैं?

 -वे लोग जिन्हें आप वसीयत में लाभ देने की इच्छा नहीं रखते हैं। गैर-लाभार्थी आपके माता-पिता, पतिपत्नी, बच्चे और पोते, अन्य रिश्तेदार, मित्र, संगठन, ट्रस्ट आदि कोई भी हो सकते हैं।

Q.ट्रेस्ट विल क्या है?

-किसी नाम से एक ट्रस्ट बनाकर पूरी संपत्ति उसके अधीन कर दी जाती है। फिर हर महीने ट्रस्ट के

माध्यम से नामित व्यक्ति को वसीयत के आधार पर राशि दी जाती है। इसे ट्रस्ट विल कहा जाता है।

किसी नाबालिग के बालिग होने तक व्यक्ति ट्रस्ट संपत्ति की देखभाल करता है। धर्मार्थ-परमार्थ ट्रस्ट

बनाकर भी वसीयत बनाई जा सकती है।

Q.वसीयत में पैतृक संपत्ति का उल्लेखजरूरी है?

-वसीयतकर्ता को किसी भी पैतृक संपत्ति का उल्लेख नहीं करना चाहिए, जब तक कि उसके

पास ऐसी कोई संपत्ति या हिस्सा न हो, जो कानून की निर्धारित प्रक्रिया का पालन करके कानूनी रूप से उसके कब्जे में आ गई हो।

                      


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