इन पांच तरीकों से बच्चों की गणित से दोस्ती कराएं
गणित एक महत्वपूर्ण सब्जेक्ट है परंतु बहुत से विद्यार्थी गणित
को मुश्किल विषय मानते है और इससे डरते है, अक्सर ऐसे छात्रों
के नंबर गणित में बहुत कम आतें है | आज हम यह जानेंगे कि
क्यों कई छात्रों को गणित एक कठिन विषय लगता है और पेरेंट्स
क्या करें की उनके बच्चों के लिए गणित भी एक सरल विषय बन
जाए |
क्यूँकि गणित का उपयोग परीक्षा में पास होने
तक सीमित नहीं है | परीक्षा में पास होने के साथ-साथ डेली की
लाइफ में गणित का कई बार यूज़ होता है | बहुत से छात्र गणित
को मुश्किल सब्जेक्ट मानते है और इससे डरते है, अक्सर ऐसे
छात्रों के नंबर गणित में बहुत कम आतें है | वही बहुत से छात्र
ऐसे भी है जो गणित को सबसे स्कोरिंग विषय मानते है और ऐसे
छात्रों के सबसे ज्यादा नंबर गणित में ही आते हैं | मैथ्स के बहुत
से अध्यापक और विद्यार्थी मानते हैं की गणित ही ऐसा विषय है
जिसमें आसानी से अधिक नंबर (या पूरे) नंबर प्राप्त किए जा
सकते है | बेसिक कन्सेप्टस को क्लियर करें और भरपूर प्रैक्टिस
करे:
पहला- मॉडल ना रटवाएं गणित की सामान्य कक्षा जवाबों से शुरू होती है। गुणा-भाग के नियम बता
दिए जाते हैं, बच्चों को उन्हीं नियमों से जवाब तक पहुंचने का रास्ता रटा दिया जाता है। पढ़ाने के
इस मॉडल में उन्हें रास्ता याद रखने के लिए कहा जाता है। इस प्रक्रिया में संदेह करने या कल्पना
करने की कोई गुंजाइश ही नहीं बचती।
दूसरा- पर्याप्त समय दें किसी सवाल के हल के लिए सोच तभी सकते हैं, जब पर्याप्त समय हो। 30
सेकंड में हल ढूंढने वाला टास्क स्कूलों में बहुत सामान्य है। लगता है कि जो जल्द जवाब नहीं खोज
पाया, उसे गणित ही नहीं आती! बच्चों को समझाएं कि समस्याओं का समाधान निकालने पर फोकस
करें, ना कि समय पर।
तीसरा- सही जवाबों के फेर में ना उलझने दें आप कोई जवाबों की कुंजी नहीं है। सवालों का हल नहीं
आता, तो कहें कि मुझे नहीं पता, चलो मिलकर ढूंढते हैं। बच्चों के साथ मैथ्स हल करने में हर
सवाल का जवाब जानने की जरूरत नहीं है। आप बच्चों से ही सवालों को एक्सप्लेन करने के लिए
कह सकते हैं।उन्हें सिखाएं कि वे भी सही जवाब के फेर में ना फंसें। जवाब पता नहीं होना असफलता
नहीं है।
चौथा- प्रक्रिया पर ध्यान दें बच्चा अगर आकर कहे कि 2+2=12 होता है, तो आप निश्चित तौर पर
उन्हें सुधारना चाहेंगे। पर उन्हें नकारने के बजाय कहें कि हां, पर मुझे नहीं मालूम कैसे ? चलो
मिलकर इसे समझने की कोशिश करते हैं। गणित हल करने के दौरान बच्चों की विचार प्रक्रिया को
समझने के जानने के लिए उनके साथ सहभागिता करना जरूरी है। इससे उनमे आत्मविश्वास आएगा।
पांचवा- नियमों में ना फंसें गणित मतलब खेल, संकतों की मदद से खोजना और नियम तोड़ना भी
है। जो टीचर या पैरेंट्स बच्चों को मैथ्ससे खेलने की इजाजत देते हैं, वे उन्हें इसके ऊपर एकाधिकार
हासिल करने की स्वतंत्रता भी देते हैं। जिस घर में पहेलियां, सुडोकू और इस तरह की किताबें होती
हैं, वहां बच्चे मैथ्स को खेल ही मानते है।
अपने बच्चों को सफल कैसे बनाएं?
बच्चों की सफलता को अक्सर स्कूल में उनके अंकों, उनके कॉलेज के स्तर आदि से
जोड़ा जाता है, जो उनके बचपन और उनके माता-पिता से जुड़े होते हैं।लेकिन पेशेवर
जीवन में उन्हें खुद ही आगे बढ़नाहोता है। ऐसे में बच्चे आगे के जीवन में भी, माता-
पिताकी मदद के बिना सफलरहें, इसके लिए कुछ चीजेंउनके बचपन से ही
अपनाना जरूरी है। यहां ऐसे दो टिप्सदिए जा रहे हैं।
1. ज्यादा मदद न करें हम बच्चों को अक्सर जताते हैं कि वे कोई विशेष काम हमारे बिना नहीं कर
सकते। हम उनकी जरूरत से ज्यादा मदद करते हैं, आवश्यकता से अधिक उन्हें दिशा देने की कोशिश
करते हैं। ऐसा करने से उनके अंदर आत्म-क्षमता की भावना पैदा नहीं हो पाती। यानी वे यह नहीं
सोच पाते कि उनमें किसी कार्य को स्वयं करने की क्षमता है, जो कि मानव मन के लिए जरूरी है,
बच्चे के आत्मसम्मान के लिए जरूरी है। पैरेंट्स बच्चों में यह आत्म-क्षमता विकसित करें।
2. घर के काम करवाएं प्रतिष्ठित हार्वर्ड ग्रांट स्टडी में सामने आया था कि जो पेशेवर अपने जीवन में
सफल रहे, वे बचपन में घर के काम किया करते थे। जैसे साफ सफाई में मदद या मां की किचन में
मदद। बच्चे ऐसा करना जितने जल्दी शुरू करें, उतना उनके लिए अच्छा होगा। इससे बच्चों में यह
भावना आती है कि कुछ काम ऐसे हैं, जो सबको नापसंद हैं, पर किसी को तो इन्हें करना होगा।
इससे वे जिम्मेदारी लेना और कार्यस्थल पर बाकियों से आगे निकलना सीखते हैं।
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