Property ke sabhi tarh k problem (viwad/conflicts) se bachati hai Registry
संपत्ति किसी भी रूप में आपको मिल सकती है, जैसे- आपने खुद
खरीदी हो। दूसरो के द्वारा दान या उपहार में मिली हो।पट्टे(lease)
की हो, जायदाद में हिस्सा मिला हो। जैसे भी संपत्ति आपको
मिलती है, तुरंत उसकी रजिस्ट्री करा लेना चाहिए।
पंजीकरण अधिनियम 1908 के सेक्शन 17 के अनुसार वह सभी लेनदेन, जिसमें किसी भी प्रकार की
100 रुपए से अधिक कीमत वाली चल-अचल संपत्ति की बिक्री शामिल होती है, वैसे सभी लेनदेन में
पंजीकरण कराना अनिवार्य होता है। इसका मतलब यह है, कि चल-अचल संपत्ति की बिक्री से जुड़े
सभी लेनदेन को पंजीकृत कराया जाना चाहिए। इसी के साथ, अचल संपत्ति के किसी भी गिफ्ट के
साथ 12 महीनों से ज्यादा की अवधि/period के लिए lease पर दी गई संपत्ति को भी अनिवार्य रूप
से पंजीकृत कराना जरूरी है। साफ शब्दों में यूं समझें कि संपत्ति खरीदना लोगों के लिए सबसे
महत्वपूर्ण निवेश में से एक है, इसलिए तुरंत रजिस्ट्री कराकर संपत्ति पर कानूनी रूप से अधिकार
हासिल कर लेना यह आपके लिए अच्छा रहेगा।इसके अलावा रजिस्ट्रीकरण आपको किसी भी विवाद से
बचाता है। एक बात और, यह संपत्ति आप किसी अन्य व्यक्ति से खरीदते हैं, यदि आपने समय पर
इसे अपने नाम नहीं कराई तो हो सकता है कोई दूसरा उस पर दावा कर दे। कानून भी आपका साथ
तभी देगा जब रजिस्ट्री आपके नाम हो चुकी हो। इस सीरीज में हम आपको प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन के बारे
में जानकारी देंगे।
संपत्ति के प्रकार
संपत्ति दो प्रकार के होते हैं। एक, चल संपत्ति और दूसरी अचल संपत्ति। चल संपत्ति में वह है
जिसका आकार, प्रकार बदले बिना एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित की जा सकती है।
अचल संपत्ति में जमीन, जायदाद, घर, खेत आदि आते हैं।
दस्तावेजों का रजिस्ट्रेशन
स्टैंप ड्यूटी पेय करने के बाद दस्तावेजों को इंडियन रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत पंजीकृत कराया जाना
जरूरी है।जिस इलाके में आपका प्रॉपर्टी है, उसके न्यायिक क्षेत्र में आने वाले सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में
यह प्रक्रिया पूरी होती है।दस्तावेजों के पंजीकरण का बुनियादी मकसद दस्तावेजों को अमल में लाना
होता है। ज्यादातर राज्यों में रजिस्ट्रेशन फीस स्टैंप ड्यूटी का कुछ प्रतिशत तय है। जब तक सरकारी
रिकॉर्ड्स में डीड खरीददार के नाम नहीं लिखी जाती, जब तक वह घर का आधिकारिक मालिक नहीं
माना जाता। रजिस्ट्रेशन की एक असली कॉपी रजिस्ट्रार के पास रहती है, जिसे किसी विवाद के वक्त
रेफर किया जा सकता है।
Kisi wakil se property deed ko satyapit/verify karaye
आमतौर पर आपके दस्तावेज़ों को पंजीकरण करने के लिए 15 दिन का समय लगता है। अगर आपने
गृह ऋण लिया है तो बैंक प्रतिनिधि दस्तावेज लेने आएगा या आप बैंक जाकर दस्तावेज जमा कर
सकते हैं।
जमीन पर बना घर, प्लाट, फ्लैट या कोई जमीन खरीदना किसी भी व्यक्ति के जीवन में सबसे जरूरी
काम में से एक होता है। व्यक्ति अपनी पूरा जमा पूंजी अथवा बैंक से कर्ज लेकर प्रॉपर्टी खरीदता है।
इसलिए जरूरी है कि इसमें अतिरिक्त सावधानी बरती जाए जिससे कोई आपकी मेहनत की कमाई
हथिया न सके या धोखे से आप गलत प्रॉपर्टी न खरीद लें। इसके लिए जरूरी है कि खरीदी गई प्रॉपर्टी
के सभी दस्तावेज किसी जानकार को दिखवा लें। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही
सौदा आगे बढ़ाना चाहिए। हम आपको उन दस्तावेजों की जानकारी दे रहे हैं, जिन्हें चेक कर आप
घपलेबाजी से बच सकें।
रजिस्ट्री कराने से पहले इन दस्तावेजों को ठीक से जांच ले
• सेल डीड : यह कानूनी दस्तावेज प्रॉपर्टी के मालिकाना हक की पुष्टि करता है। यह सबूत है कि
पुराने मालिक से प्रॉपर्टी मौजूदा विक्रेता को ट्रांसफर की गई। यह भी सुनिश्चित करें कि प्रॉपर्टी
बेचनेवाले के नाम दर्ज हो। अच्छा तरीका यह है कि किसी वकील से प्रॉपर्टी डीड को सत्यापित कराएं।
• बिल्डिंग प्लान अप्रूवल : बिल्डिंग में फ्लैट खरीद रहे हैं तो पता करें कि बिल्डर ने बिल्डिंग प्लान
अथॉरिटी के कमिशनर या उनके द्वारा नियुक्त अधिकारी से अप्रूव कराया है या नहीं। इससे पता
चलेगा कि बिल्डिंग कानूनी तरीके से बनी है।
• लोन सर्टिफिकेट : यह सर्टिफिकेट सुनिश्चित करता है कि संबंधित प्रॉपर्टी पर कोई लोन या अन्य
देनदारी तो नहीं है? मतलब यह कि आप जो प्रॉपर्टी खरीद रहे हैं वह हर तरह के कर्जमुक्त हो। दूसरे
शब्दों में यह सर्टिफिकेट किसी मोर्गेज, टाइटल ट्रांसफर या कानूनी रूप से रजिस्टर्ड ट्रांजेक्शन का
सबूत है जिससे प्रॉपर्टी पर कोई सवाल न उठे।
• कंप्लीशन सर्टिफिकेट : स्थानीय निकाय द्वारा जारी यह सर्टिफिकेट साबित करता है इस प्रॉपर्टी का
निर्माण उसके दिशा निर्देशों के हिसाब से हुआ है। यह पानी, बिजली, सीवर जैसी बेसिक जरूरतों के
हिसाब से बहुत आवश्यक सर्टिफिकेट है। अगर यह नहीं मिला तो प्रॉपर्टी में बेसिक सुविधा जुटाना व
हासिल करना मुश्किल हो सकता है।
• ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट : कंप्लीशन सर्टिफिकेट जारी करने के बाद स्थानीय निकाय (नगर निगम या
अथॉरिटी) ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट जारी करता है। इस सर्टिफिकेट से पता चलता है कि निवास करने के
लिए बनी इस प्रॉपर्टी का निर्माण सभी नियमों का पालन करते हुए किया गया है।
• पॉवर ऑफ एटॉर्नी : यह एक कानूनी दस्तावेज है जिसकी मदद से कोई व्यक्ति किसी अन्य को
प्रॉपर्टी की देखभाल, किराए पर उठाने या बेचने के लिए अधिकृत करता है। हालांकि, इसका भी
रजिस्ट्रेशन कराया जाना जरूरी है।
Registry ke liye badhwa sakte hai aur 4 mahine ki awadhi
स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन चार्ज बचाने के लिए कई लोग पॉवर ऑफ एटॉर्नी के जरिये प्रॉपर्टी खरीद
लेते हैं। धोखा यह होता है कि इसमें एक ही प्रॉपटी कई लोगों को बेच दी जाती है और आप मुकदमे
बाजी में फंस जाते हैं।
स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन शुल्क राज्य सरकार के खाते में जाता है। चूंकि यह राज्य का विषय है,
इसलिए विभिन्न राज्यों में रजिस्ट्री की दरें अलग हो सकती हैं। शहरी इलाकों में स्टांप ड्यूटी ज्यादा
होती है। जब आप प्रॉपर्टी संबंधी सभी दस्तावेजों की फाइल तैयार कर लेते हैं तो उसके बाद आपको
रजिस्ट्रार ऑफिस में जाकर इनका पंजीकरण कराना होता है। इसके लिए कुछ फीस लगती है।
दस्तावेज पंजीकृत कराने के बाद का अगला कदम है स्टांप शुल्क के मूल्य के बराबर स्टांप पेपर
खरीदने की। आप चाहें तो स्टांप पेपर ऑनलाइन (ई-स्टांप पेपर) खरीद सकते हैं या लाइसेंस प्राप्त
किसी स्टांप विक्रेताओं से भी ले सकते हैं। स्टांप ड्यूटी का ऑनलाइन भुगतान भी कर सकते हैं।
स्टांप ड्यूटी चुकाने की रसीद के साथ आप अपने दस्तावेज उस इलाके के सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में
जमा कराएं जिस इलाके में आप प्रॉपर्टी खरीद रहे हैं। संपत्ति की रजिस्ट्री कराते वक्त बेचवाल और
खरीदार दोनों को दो गवाहों के साथ उपस्थित होना होता है। अतः आप अपने गवाह साथ लेकर जाएं।
दोनों पार्टियों के अपने-अपने आईडी प्रूफ जैसे कि आधार कार्ड, पैन कार्ड या सरकार द्वारा जारी किया
गया कोई पहचान-पत्र भी चाहिए होते हैं। इसके बाद संपत्ति आपके नाम दर्ज हो जाती है, जिसे
रजिस्ट्री करान कहते हैं। सभी दस्तावेज स्कैन कर आपको लौटा दिए जाते हैं।
स्टांप ड्यूटी हजारों या कुछ लाख रुपए हो सकती है। ऐन वक्त पर आपके पास इतने पैसे
का इंतजाम नहीं है तो दस्तावेजों का पंजीयन कराने के बाद आपको चार महीने का समय दिया जाता
है रजिस्ट्री कराने के लिए। आप चाहें तो चार महीने बाद एप्लिकेशन देकर फिर से चार महीने की
मोहलत मांग सकते हैं पैसों के इंतजाम के लिए।
सामान्य तौर पर पूछे जाने वाले प्रश्न-उत्तर
✋ संपत्ति पंजीकरण का उद्देश्य क्या है?
- पंजीकरण कानूनी रूप से जरूरी है। संपत्ति पंजीकृत होने का मतलब है कि अब इसके मालिक आप
ही हैं कोई और नहीं। यह हस्तांतरण दस्तावेज एक सार्वजनिक रिकॉर्ड बन जाता है।
✋ विरासत में अर्जित संपत्ति का हस्तांतरण जरूरी है?
- नहीं। एक संपत्ति के मालिक की मृत्यु बाद उसके उत्तराधिकारी द्वारा मृत्यु प्रमाण-पत्र की कॉपी
जमा करने पर संपत्ति उत्तराधिकारी के नाम हो जाती है।
✋ चैरिटेबल ट्रस्ट को संपत्ति दान करने पर स्टांप ड्यूटी चुकानी होगी?
- यह आपके राज्य के कानून और किस तरह डीड बनवाई गई है, उस पर निर्भर करता है। चैरिटेबल
ट्रस्ट को संपत्ति दान करने पर स्टांप ड्यूटी कम की जा सकती है या छूट मिल सकती है। वहीं, गैर-
सरकारी संस्था को दान कर रहे हैं तो स्टांप ड्यूटी नहीं देनी पड़ेगी।
✋ गवाह के रूप में साइन कौन कर सकता है?
- आपकी पहचान का वह हर व्यक्ति जो 18 वर्ष से अधिक आयु का हो।
✋ हस्तांतरण दस्तावेज पंजीकृत न होने से क्या होगा?
- आप मुसीबत में फंस सकते हैं। इस तरह के दस्तावेजों का पंजीकरण होना अनिवार्य होता है। वर्ना
कोर्ट-कचहरी के मामले में फंसने पर आप अपना हक होने का सबूत पेश नहीं कर पाएंगे।
Jankari na dene par 200% tak income tax jurmana
गिफ्ट डीड के जरिये आप प्रॉपर्टी रिश्तेदारों को देकर टैक्स बचा सकते हैं। प्रॉपर्टी हस्तांतरण कर दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ, हानि से बच सकते हैं, लेकिन आपको कीमत के अनुसार स्टांप ड्यूटी तो चुकानी ही होगी।
इस अंतिम भाग में हम उपहार में दी जाने वाली संपत्ति के बारे में बता रहे हैं। यदि आपने कोई
संपत्ति किसी को 'रजिस्टर्ड गिफ्ट डीड' के जरिये दे दी है तो स्टांप ड्यूटी चुकाने और रजिस्ट्री के
तुरंत बाद मालिकाना हक बदल जाएगा। फिर, मन बदलने पर आप इसे दोबारा हासिल नहीं कर
पाएंगे।रजिस्ट्रेशन एक्ट 1908 के प्रावधानों के मुताबिक 'गिफ्ट डीड' सामने वाले पक्ष में कानूनन वैध
मानी जाएगी। गिफ्ट संपत्ति तभी वापस ले सकते हैं, जब प्रॉपर्टी एक्ट 1982 सेक्शन 126 के
मुताबिक अगर आप कॉन्ट्रैक्ट में यह साफ-साफ लिखते हैं कि आप चाहें तो संपत्ति वापस ले सकते
हैं। एक जरूरी बात, आपको जमीन-जायदाद-प्लाट या कोई संपत्ति उपहार में कहीं से मिली है तो
इसकी जानकारी आयकर भरते समय रिटर्न फॉर्म में देना जरूरी है। अगर जानकारी नहीं दी और
आयकर जांच में यह बात समाने आती है तो आप पर संबंधित संपत्ति की कीमत से 200 फीसदी
तक जुर्माना लग सकता है।
सामान्य तौर पर पूछे जाने वाले प्रश्न-उत्तर
✋ कृषि भूमि हस्तांतरण पर क्या प्रतिबंध हैं?
राज्य के राजस्व कानूनों के अनुसार अनुसूचित जाति या जनजाति के लोगों को दी गई भूमि या
अनुदान की भूमि राज्य सरकार की अनुमति बिना खरीदी नहीं जा सकती। ।
✋ पॉवर ऑफ अटॉर्नी कब रद्द होती है? इससे संपत्ति मालिक बन सकते हैं क्या।
प्रथम पक्ष की मृत्यु पर रद्द हो जाती है। प्रिंसिपल (एक्जीक्यूटेंट/फर्स्ट पार्टी) किसी भी समय इसे रद्द
कर सकता है। वहीं, पॉवर ऑफ अटॉर्नी से कोई संपत्ति का मालिक नहीं बन सकता। आप सिर्फ
संपत्ति की देखभाल करने वाले होते हैं।
✋ क्या पंजीयक पंजीकरण से मना कर सकता है?हां। यदि रजिस्ट्री कराने वाले के पास खरीदी के पक्के प्रूफ न हों। पंजीकरण के चार महीने बीत
चुकने पर दस्तावेज पेश किए गए हों। दस्तावेज नाबालिग द्वारा पेश किए हों। संपत्ति उप-जिले के
भीतर स्थित न हो।
✋ प्रॉपर्टी गिफ्ट पर टैक्स का हिसाब क्या होगा?
ऐसे मामलों में अगर वह शख्स आपका रिश्तेदार नहीं है तो उसे टैक्स चुकाना पड़ सकता है। टैक्स
कानून के मुताबिक वित्त वर्ष में किसी को 50 हजार का गिफ्ट मिलता है तो उसे अन्य स्रोतों से
प्रमुख आय के तहत टैक्स चुकाना पड़ेगा।
गिफ्ट डीड पर टैक्स : आपको पता होना चाहिए कि सभी उपहार करमुक्त नहीं होते हैं। पुराने
कानून को रद्द कर फाइनेंस एक्ट 2004 में सेक्शन 56 (2) (v) जोड़कर गिफ्ट पर टैक्स वसूलना
लागू किया गया है। नकद मिले या कोई संपत्ति, एक वित्त वर्ष में 50 हजार रुपए तक ही टैक्स फ्री है।
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