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MATERNITY COVER: This is how you can avoid the waiting period

 बच्चों पर भविष्य में होने वाला खर्च माता-पिता की रोजमर्रा जिंदगी
पर असर डालेगा। इसलिए ऐसे दंपति जो बच्चे की प्लानिंग कर रहे हैं,
उनके लिए ऐड ऑन मेटरनिटी कवर वाला हेल्थ इंश्योरेंस लेना
फायदेमंद रहेगा।

 

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आज के समय में प्रसव के ऊपर काफी खर्च

होता है। मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए प्राइवेट

अस्पतालों में प्रसव कराना महंगा होता जा

रहा है। एक बार में प्रसव पर 70 हजार से

लेकर कुछ लाख रुपए तक का खर्च आता

है। सामान्य प्रसव हो तो ठीक, यदि सीजेरियन

हुआ तो बहुत पैसा खर्च करना पड़ता है। गर्भ

धारण के बाद से ही नियमित जांच, दवाएं,

अस्पताल खर्च इत्यादि किसी चुनौती से

कम नहीं है। ऐसे खर्चों से बचने के लिए

मातृत्व बीमा कवर यानी ' मेटरनिटी मेडिकल

इंश्योरेंस' एक बेहतर समाधान हो सकता है,

खासकर युवा दंपतियों के लिए। बेहतर यही

होगा कि शादी के बाद मेटरनिटी कवर ले

लें, ताकि जरूरत के समय वेटिंग पीरियड से

बच सकें। हेल्थ इंश्योरेंस देने वाली अनेक

कंपनियां 20-25 वर्ष की आयु वाले दंपतियों

के लिए मेटरनिटी कवर विशेष रूप से तैयार

करती हैं। हालांकि, वर्तमान में कुछ कंपनियां

ज्यादा उम्र की महिलाओं को भी शामिल कर

रही हैं। अधिक आयु की महिलाओं के लिए

इन कंपनियों के अलग-अलग प्लान होते हैं।

मातृत्व सुरक्षा बीमा लेते समय इन बातों का रखें ध्यान

●मौजूदा समय में मेटरनिटी प्लान 2 से 4 वर्ष की प्रतीक्षा अवधि (वेटिंग पीरियड) के साथ मिलते हैं। इसलिए पॉलिसी को जल्द से जल्द खरीदें।    

●' मेटरनिटी लाभ देने वाले प्लान' के  लिए अलग-अलग नियम और शर्ते होती हैं। इसलिए स्वास्थ बीमा खरीदते समय  नियमों-शरतो को जरूर पढ़ें।

● वेटिंग पीरियड, कवरेज लिमिट, सामान्य एवं सीजेरियन डिलीवरी वाले सेक्शन की शर्ते

 तथा इनके ' कवर लिमिट' को जरूर पढ़ें।

● पॉलिसी लेने से पहले यह जान लें कि नवजात शिशु को पहले दिन से हेल्थ कवरेज,

 टीकाकरण सहित अन्य फीचर हैं या नहीं?

यह सब शामिल रहता है आपके मेडिकल  प्लान में 

• अस्पताल में निशुल्क कमरा, नर्सिंग, एनेस्थेटिस्ट, सर्जन तथा एम्बुलेंस शुल्क, अस्पताल में होने वाले खर्च (24 घंटे रहने के लिए) शामिल होते हैं। इसके अलावा  अल्ट्रासाउंड, दवाएं, डॉक्टर के परामर्श शुल्क, नियमित जांच आदि से संबंधित लागत शामिल है। इसमें मां के लिए पूर्व और पोस्ट डिलीवरी चिकित्सा एवं देखभाल के कारण होने वाले व्यय भी शामिल होते हैं। 

• भर्ती होने से 30 दिन पहले जांच परीक्षण, दवाएँ , परामर्श शुल्क इत्यादि पर चिकित्सा का खर्च भी इसमे शामिल है।

• एडमिट होने से पहले 30 दिन तक के और बच्चे के जन्म के 60 दिन बाद तक का  खर्च इस पॉलिसी में शामिल रहता है।

 • अगर बच्चे को कोई पैदाइशी बीमारी हो, तो ऐसी स्थिति में 1 से 90 दिन तक का ' नवजात शिशु कवरेज' लेना लाभदायक रहता है। याद रखें, यह पॉलिसी देने वाली  संस्था की प्रामाणिकता जरूर जांच लें।

'FAMILY FLOATER PLAN' will get more benefit 

हेल्थ के लिए कोई भी पॉलिसी खरीदना ठीक नहीं होता।
जरूरी यह है कि उसके बारे में पूरी जानकारी ली जाए।
यदि आप परिवार के सभी सदस्यों को एक पॉलिसी में
कवर करते हैं तो यह आप सभी के लिए बहुत फायदेमंद है।

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ज्यादातर परिवारों के सदस्य स्वयं का हेल्थ

प्लान लेकर रखते हैं, जिसे ' इंडिविजुअल हेल्थ

प्लान' कहते हैं। यदि कोई व्यक्ति पूरे परिवार

के लिए स्वास्थ्य बीमा खरीदना चाहता है, तो

उसे फैमिली फ्लोटर प्लान ' का विकल्प चुनना

चाहिए। कई बार हमें इंडिविजुअल या फैमिली

फ्लोटर प्लान के बीच चुनाव करना मुश्किल

हो जाता है। इसलिए हम आपको इनके बीच

का अंतर बता रहे हैं। इंडिविजुअल हेल्थ प्लान

परिवार के प्रत्येक व्यक्ति के नाम पर अलग

अलग लिया जाता है। इसमें प्रत्येक व्यक्ति

की आयु और बीमा राशि के अनुसार प्रीमियम

तय होती है। इस प्लान की एक ही खासियत

है कि परिवार के एक से अधिक सदस्यों का

बीमा साथ में कराया जाए तो बीमा कंपनी कुल

प्रीमियम पर 10 फीसदी छूट देती है। अब आता

है फैमिली फ्लोटर हेल्थ इंश्योरेंस प्लान। इसमें

एक ही प्लान में परिवार के सभी सदस्य कवर

हो जाते हैं। साथ ही सभी की प्रीमियम भी एक

ही आती है। उदाहरण के लिए इसे यूं समझते हैं

कि किसी परिवार में चार सदस्य हैं। आप सभी

के लिए दो-दो लाख रु. का इंडिविजुअल प्लान

लेते हैं। इसमें प्रत्येक को दो लाख रुपए का ही

 कवर मिलेगा। इसके विपरीत आप 8 लाख

रुपए का ‘ फैमिली फ्लोटर ' प्लान खरीदते हैं तो

सभी को दो के बजाय 8 लाख रु. का कवर

मिलेगा। यह जरूरी नहीं कि सभी सदस्य एक

ही समय अस्वस्थ हो जाएं। किसी सदस्य की

बीमारी पर अचानक 5 से 7 लाख रु. का खर्च

करना पड़े तो फैमिली प्लोटर आपको आर्थिक

परेशानी से बचा लेगा। यह प्लान बनाने के पीछे

कंपनियों की अवधारणा यही है कि परिवार के

सदस्यों के एक साथ बीमार पड़ने की आशंका

नहीं के बराबर होती है। वैसे इंडिविजुअल और

फैमिली फ्लोटर ' इनडेमनिटी' प्लान हैं। इसका

मतलब है कि अस्पताल में भर्ती होने के दौरान

हुआ खर्च आपको वापस मिलता है।

इंडिविजुअल प्लान से दो गुना लाभ

अगर कोई व्यक्ति 30 से 35 वर्ष का है तो 10 % छूट के बाद उसके 5 लाख रुपए के इंडिविजुअल

हेल्थ प्लान में लगभग 12,497 रुपए प्रीमियम आएगा। इतनी ही बीमा राशि वाले फैमिली फ्लोटर

प्लान में प्रीमियम करीब 10,416 रुपए होता है। इस तरह आपको 20 % लाभ मिलता है।

बच्चों के लिए आयु सीमाः फैमिली फ्लोटर प्लान में माता-पिता की उम्र मायने नहीं रखती, लेकिन

बच्चों की उम्र रखती है। अलग-अलग प्लान में बच्चों को 18 से 25 वर्ष के बीच वयस्क माना

लिया जाता है। अगर आपके बच्चे इससे छोटे हैं तो फैमिली फ्लोटर प्लान लेने में समझदारी है। यह

प्लान कम लागत में बेहतर कवर के साथ ही नो क्लेम की स्थिति में बोनस जुड़ता चला जाता है।

गोल्डन-सिल्वर जैसी कई स्कीम हैं बाजार में: हेल्थ प्लान देने वाली कंपनियों ने बाजार में

कई तरह की स्कीम लागू की हुई हैं। इनमें ब्रोंज, सिल्वर, गोल्ड तथा प्लेटिनम के नाम से

प्लान उपलब्ध हैं। नाम से जाहिर है कि प्लेटिनम या गोल्डन में आपको अधिक सुविधाएं

मिलेंगी। इसकी अधिक जानकारी आप हेल्थ कवर देने वाली कंपनी से प्राप्त करें।

FLOATER PLAN becomes expensive after the age of 55

फ्लोटर प्लान के इस भाग में हम बता रहे हैं कि यह
किस आयु समूह के लिए फ्लोटर प्लान सस्ता पड़ेगा
और किस आयु समूह के लिए व्यक्तिगत प्लान
बेहतर रहेगा। प्लान का चुनाव आपको करना है।

परिवार में यदि सभी सदस्य युवा हैं और

सभी की ' हेल्थ रिस्क लो' है तो उनके लिए

यह बेस्ट प्लान है। इसके अलावा, परिवार

में कोई नया सदस्य जुड़ता है (जैसे बच्चे का

जन्म होना) तो उसे भी इस स्कीम में तुरंत

शामिल किया जा सकता है। कोई विवाहित

जोड़ा 30 वर्ष की आयु से कम है तो उसे

फैमिली फ्लोटर प्लान को प्राथमिकता देना

चाहिए। उदाहरण के लिए ये कपल पांच

लाख रुपए का फैमिली प्लान लेता है तो

उसकी प्रीमियम लगभग 8 से 12 हजार रुपए

हो सकती है। (हम यहां अनुमानित राशि की

जानकारी दे रहे हैं। अधिक जानकारी के लिए

अपनी हेल्थ कंपनी से संपर्क करें)।

● 35 वर्ष की मध्यम आयु वर्ग के लिए: 

एक या दो बच्चों के साथ यह प्लान

बेहतरीन विकल्प है। उदाहरण के लिए- इस

परिवरा को करीब 7 लाख रुपए का हेल्थ

करवेज लेने पर तीन से चार सदस्यों के बीच

15 से 20 हजार रुपए प्रीमियम हो सकती

है, जोकि प्रति सदस्य केल्कुलेट की जाए तो

बहुत कम है।

●मध्यम-वृद्ध परिवार (35-45):

इस आयु समूह के दौरान अपनी मौजूदा

योजना में गंभीर बीमारी का एक अतिरिक्त

सेक्शन जोड़ना बेहतर रहेगा। क्योंकि उम्र के

साथ बीमारी की रिस्क बढ़ जाती है। ऐसे में

अतिरिक्त कवरेज, आपके अस्पताल में भर्ती

होने की लागत को कवर करेगा। इसके लिए

आपको 10 लाख रुपए वाला फैमिली प्लान

लेना चाहिए जिसमें 20 से 30 हजार तक

की प्रीमियम सभी रिस्क कवर करेगी।

●बड़े और वृद्ध (45-55 वर्ष): फ्लोटर

और व्यक्तिगत स्वास्थ्य बीमा, दोनों लेना

उचित रहेगा। आपकी उम्र 45 से 55 वर्ष

होने को है तो आपका इंडिविजुअल प्लान

गंभीर बीमारी को कवर करेगा। वहीं, फैमिली

प्लान अन्य सदस्यों को कवर देगा। जैसा कि

हमने ऊपर बताया था कि फैमिली प्लान में

बढ़ती आयु के सदस्यों को कंपनियां शामिल

नहीं करती हैं। इसमें आपको 10 लाख वाला

फ्लोटर और 5 लाख रुपए वाला इंडिविजुअ

प्लान लेने पर प्रीमियम की सीमा 25 हजार

से 40 हजार रुपए तक रह सकती है।

कुछ कमियां भी हैं इस प्लान में

• परिवार में सीनियर सिटीजन है तो अधिक

प्रीमियम निर्धारित किया जाता है। या उनके

लिए व्यक्तिगत प्लान लेना पड़ता है।

• परिवार के सदस्यों की एक निश्चित आयु

सीमा तक ही प्लान री-न्यू कराया जा सकता

है। प्लान में शामिल कोई सदस्य उम्रदराज है

तो बाकी सदस्यों के नाम पॉलिसी री-न्यू नहीं

की जा सकती।

• प्लान पीरियड में कोई सदस्य बीमार होकर

क्लेम ले लेता है तो नो क्लेम बोनस का

फायदा अन्य सदस्यों को पॉलिसी रीन्यू होने

तक नहीं मिलेगा।

• इस प्लान में माता-पिता, बच्चे (आश्रित

माता-पिता हों तो वे भी) ही शामिल किए

जा सकते हैं। लेकिन मदर इन लॉ या फादर

इन लॉ जैसे ससुराल वाले अन्य लोगों को

शामिल नहीं कर सकते। उनके लिए आपको

इंडिविजुअल प्लान ही लेना पड़ेगा।

Policy can be canceled in 'free look period'

हेल्थ बीमा पॉलिसी खरीदने का निर्णय लेते समय इस बात
का ध्यान जरूर रखें कि बीमा कंपनी इंश्योरेंस रेगुलेटरी
एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी के साथ पंजीकृत है या
नहीं। लाइसेंस प्राप्त एजेंट या ब्रोकर से पॉलिसी खरीदें।

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बीमा एक जटिल विषय है जो किसी

व्यक्ति द्वारा मांगे गए हेल्थ कवर में

नियमों और शर्तों के अनुसार ही आपकी

क्षति की पूर्ति करने का वादा करता है।

आपने हेल्थ कवर खरीदा है और आपको

लगता है कि आप यह पॉलिसी तो नहीं

चाहते थे? ऐसे में आप इसे लौटाकर

अपनी धनराशि पुनः प्राप्त कर सकते हैं।

सीधे कहें तो आप कंपनी के नियमों व

शर्तों से सहमत नहीं हैं तो इंश्योरेंस के

दिशानिर्देशों के अनुसार पॉलिसी जारी

करने की तारीख से 15 दिन के भीतर

उसे वापस कर सकते हैं। इसे ' फ्री-लुक

पीरियड' कहा जाता है।

      याद रखें कि फ्री-लुक पीरियड का

लाभ हेल्थ इंश्योरेंस तथा तीन वर्ष तक

वाले जीवन बीमा पर ही दिया जाता है।

प्लान रद्द करने की सूचना देने के लिए

इंश्योरेंस कंपनी के कस्टमर केयर पर

कॉल करें। फिर उसके बाद पॉलिसी रद्द

करने का आवेदन प्रस्तुत करने के लिए

इंश्योरेंस कंपनी के कार्यालय चले जाएं।

कंपनी से ही पॉलिसी कैंसल करवाएं   

अगर आपने पॉलिसी केंसल करने का फैसला   

कर ही लिया है तो सीधे कंपनी के ऑफिस  

जाएं। कई कंपनियां अपनी वेबसाइट्स पर   

केंसलेशन फॉर्म उपलब्ध कराती हैं, जिसे  

डाउनलोड किया जा सकता है। इसके लिए  

किसी एजेंट को न बोलें, वह इस प्रोसेस में 

देरी कर सकता है।

पूरी राशि वापस नहीं मिलेगी

पॉलिसी रद्द कराने पर आपको पूरी रकम रिफंड

 नहीं होगी। आप फ्री-लुक पीरियड के दौरान

पॉलिसी रिटर्न करते हैं तो भी कंपनी मेडिकल

 टेस्ट और स्टाम्प ड्यूटी का खर्च काटकर ही

 पैसे लौटाएगी।

आपके लिए यह जानकारी भी जरूरी है

●हेल्थ प्लान देने वाली कंपनियों ने बाजार में कई स्कीमें जारी की हुई हैं। इनमें   

ब्रोंज, सिल्वर, गोल्ड तथा प्लेटिनम के नाम से प्लान उपलब्ध हैं। इसकी अधिक   

जानकारी हेल्थ प्लान देने वाली कंपनी से मिल जाएगी।

●आपने दो लाख का प्लान लिया है और अस्पताल में बिल 50 हजार का बना  

 है तो बीमा कंपनी 50 हजार रुपए का भुगतान करेगी। बाकी डेढ़ लाख रुपए

पॉलिसी अवधि तक बने रहेंगे। आमतौर पर ऐसी पॉलिसी एक वर्ष की ही होती है।

● 95 फीसदी हेल्थ कवर स्कीम डिजाइन करते समय उम्रदराज व्यक्ति के लिए

प्रीमियम राशि अधिक रखी जाती है, क्योंकि इनकी रिस्क अधिक होती है।

The Policy ranges from 5000 to 50 lakh

आईआरडीए ने पॉलिसीधारकों के हितों की रक्षा के 
लिए न केवल बीमाकर्ताओं पर बल्कि बीमा एजेंट्स
पर भी नियम निर्धारित किए हैं। यदि किसी एजेंट ने 
आपको ठीक से गाइड नहीं किया तो क्लेम में परेशानी हो
सकती है।

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अधिकांश बीमा लेन-देन में आमतौर पर 

एक मध्यस्थ काम करता है, जिसे बीमा एजेंट

कहा जाता है। ये एजेंट इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड 

डेवलपमेंट अथॉरिटी (IRDA) द्वारा लाइसेंस 

प्राप्त होते हैं और उपभोक्ताओं तथा बीमा

 कंपनियों के बीच एक सेतु के रूप में काम 

करते हैं। व्यक्तिगत बीमा एजेंटों और कॉर्पोरेट 

एजेंटों को भी आईआरडीए द्वारा लाइसेंस दिया 

जाता है। साथ ही इन्हें बीमा नियामक और 

विकास प्राधिकरण द्वारा नियंत्रित भी किया 

जाता है। आप किसी एजेंट के माध्यम से

हेल्थ कवर लेने वाले हों तो उसका लाइसेंस

जरूर चेक करें। हेल्थ कवर विषय पर जरूरी

जानकारी हम आपको दे चुके हैं। इस विषय

से संबंधित कुछ प्रश्नों के जवाब हम दे रहे हैं।

इस विषय में सामान्य तौर पर पूछे जाने वाले प्रश्न .

न्यूनतम कितनी राशि की पॉलिसी ले सकते हैं?

-5000 रुपए से लेकर 50 लाख तक की पॉलिसियां उपलब्ध हैं।

एक सामान्य व्यक्ति के लिए 1 लाख तक का हेल्थ कवर बेहतर रहेगा।

कितने वर्ष तक का हेल्थ कवर ले सकते हैं?

-अधिकांश गैर-जीवन बीमा कंपनियां एक वर्ष के लिए हेल्थ कवर

देती हैं। यदि प्रीमियम की चिंता न करें तो कंपनियों के पास ऐसी नीतियां

भी हैं जिनमें दो से पांच वर्ष की अवधि के भी कवर दिया जाता है।

क्या प्रीमियम किस्तों में चुका सकते हैं?

-इरडा ने सामान्य और एकल स्वास्थ्य बीमा कंपनियों को भेजे पत्र

में यह अहम बात कही है कि ग्राहक को मासिक, तिमाही और छमाही

आधार पर प्रीमियम जमा करने की सुविधा दी जाए।

क्या हेल्थ कवर के लिए मेडिकल जांच जरूरी है?

-45 वर्ष वाले और इससे ऊपर के ग्राहक यदि नई पॉलिसी लेते हैं तो

जांच जरूरी है। वैसे घर पर ही मेडिकल टेस्ट होता है। उसके लिए कोई

शुल्क नहीं लगता। हां, पुरानी पॉलिसी के नवीनीकर में जांच नहीं होगी।


कंपनी कैसे तय करती है कि पहले से कोई बीमारी नहीं है।

-फॉर्म में आपको विवरण भरना होता है। पॉलिसी लेने के बाद गंभी

बीमारी के लिए आप भर्ती होते हैं, तब उजागर होता है आपने बीमारी

छिपाई थी। ऐसी स्थिति में आपके दावों का भुगतान रुक सकता है।

कौन सी बीमारियां कवर होती हैं?

-कुछ को छोड़ लगभग सभी बीमारियां कवर होती हैं। ताजा जानकारी

के अनुसार इरडा ने बीमा कंपनियों को निर्देश दिए हैं कि कैटरैक्ट

सर्जरी, नी-कैप रिप्लेसमेंट, अल्जाइमर, पार्किंसन्स तथा फैक्ट्री में

रसायनों के साथ काम करने वाले लोगों को सांस और त्वचा संबंध

इलाज को भी हेल्थ कवर में शामिल किया जाए। रेगुलेटर ने कहा है कि

अगर बीमा कंपनी एपिलेप्सी, किड़नी की गंभीर बीमारी, एचआईवी य

एड्स को कवर नहीं करना चाहती तो इसके लिए खास शब्द इस्तेमाल

होंगे। इनके लिए एक खास वेटिंग पीरियड (30 दिन से एक साल

देना होगा, जिसके बाद कवर शुरू हो जाएगा।



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