लोकपाल बैंक से शिकायत का 30 दिन में करता है समाधान
बैंकों से ग्राहकों काे हमेशा ही शिकायत रहती है। कई बार
बैंकों की व्यस्तता या लापरवाही के कारण शिकायतों का
ठीक से निराकरण नहीं हो पाता। इसलिए आरबीआई
ने ग्राहकों को लोकपाल नामक हथियार दिया है।
बैंक लोकपाल विभिन्न बैंकों के
खाताधारकों की शिकायतों का त्वरित व
प्रभावी तरीके से निपटान करने के लिए शुरू
की गई यह एक निःशुल्क सेवा है। भारतीय
रिजर्व बैंक के तत्वावधान में सर्वप्रथम 1995
में 'बैंकिंग लोकपाल' की नियुक्ति की गई थी,
जो अर्ध-न्यायिक प्राधिकारी होता है। यूं समझें
कि 'बैंक लोकपाल' एक स्वशासी स्वतंत्र
संस्था है, जो सभी बैंकों द्वारा दी जा रही
सेवाओं पर निगरानी रखता है। 2002 में इसमें
संशोधन किया गया। 2006 में इसका दायरा
और बढ़ाया गया, ताकि सभी व्यापारिक बैंक,
शहरी तथा क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक व अनुसूचित
सहकारी बैंक पारदर्शी, जिम्मेदार और बिना
भेदभाव वाली सेवाएं अपने खाताधारकों
को प्रदान करें। वर्तमान में लागू योजना को
'बैंकिंग लोकपाल योजना 2006' के नाम से
जाना जाता है। बैंकिंग लोकपाल की नियुक्ति
अधिकतम तीन वर्ष के लिए की जाती है।
इसके ज्यादातर केंद्र राज्यों की राजधानियों
में हैं। उनके पते भारतीय रिर्जव बैंक की
वेबसाइट पर उपलब्ध हैं ।
• डाक या ई-मेल से भी भेज सकते हैं
शिकायतः इस सेवा के अंतर्गत अगर किसी
खाताधारी व्यक्ति को बैंक की सेवाओं या
कर्मचारियों से किसी भी तरह की शिकायत है तो
वह खुद या वकील के माध्यम से अपने राज्य के
बैंक लोकपाल को इसे भेज सकता है। शिकायत
लिखित में डाक से या ई-मेल द्वारा दर्ज कराई
जा सकती है। इस निःशुल्क सेवा केंद्र पर
अधिकतम 30 दिन में आपकी शिकायत का
निराकरण हो जाता है। लोकपाल को इतने
अधिकार हैं कि वह बातचीत अथवा शिकायत
का निराकरण करने के लिए बैंक प्रतिनिधि तथा
ग्राहक को अपनी अदालत में बुला सकता है।
• यह है शिकायत करने का नियमः
अपनी शिकायत सबसे पहले बैंक अधिकारी
को करें। वहां आपकी सुनवाई नहीं होती है,
अनावश्यक देरी की जाती है या बैंक के
जवाब से आप संतुष्ट नहीं हैं तो एक माह बाद
बैंकिंग लोकपाल को सभी दस्तावेजों के साथ
शिकायत भेजी जा सकती है। यानी लोकपाल
को भेजने से पहले बैंक प्रभारी को शिकायत
करना जरूरी है।
ये शिकायतें भेज सकते हैं
• एटीएम, क्रेडिट कार्ड व मोबाइल बैंकिंग से
संबंधित शिकायतें। बैंकों के सेल्स एजेंट्स
द्वारा वचनबद्ध सेवाएं न देने, ग्राहकों को पूर्व
सूचना दिए बिना सेवा प्रभार लगाने, छोटे
नोट व सिक्के स्वीकार नहीं करने या इस पर
कमीशन लेने।
• होम लोन, बिजनेस लोन, एजुकेशन लोन,
व्हीकल लोन या किसी भी प्रकार का बैंक
लोन समय पर मंजूर न करना। बिना कारण
बताए लोन आवेदन रद्द करना। या इसके
लिए किसी तरह की डिमांड करने या ग्राहक
को परेशान करने अथवा कर्मचारियों द्वारा
दुर्व्यवहार की शिकायतें।
• सभी प्रकार के बैंकिंग लेन-देन में ग्राहक
को परेशान किया जाना। खाता खोलने में देरी,
आनाकानी करना। बगैर उचित कारण बताए
खाता बंद करना। सूचना दिए बगैर किसी
तरह का प्रभार लगाना या जुर्माना लगाकर
आपके खाते से राशि काट लेना। किसी बैंक
एजेंट द्वारा वसूली की धमकी देना।
बैंक से मिली मानसिक प्रताड़ना तो एक लाख का मुआवजा
इस सेवा में यह शर्त भी शामिल है कि जब कोई
व्यक्ति शिकायत में जीत जाता है तो बैंक फैसले
की कॉपी अपने सूचना बोर्ड पर लगाए। ताकि
अन्य ग्राहक उसे पढ़कर अपने अधिकार समझ सकें।
आरबीआई ने लोकपाल को कई
अधिकार दिए हैं। शिकायतों पर गंभीरता
से विचारकर दोनों पक्षों में सहमति
बनवाना प्रमुख कार्य है। उसे यह ध्यान भी
रखना है कि उसके पास आई जानकारी
गोपनीय रहे। संबंधित व्यक्ति की अनुमति
के बिना उसकी कोई जानकारी वह
किसी और से साझा नहीं करेगा। जिस
भी बैंक शाखा के खिलाफ शिकायत
आएगी, उसके नोडल अधिकारी के नाम
लोकपाल कार्यालय से शिकायत की एक
कॉपी निर्देशों के साथ भेजी जाती है। फिर
नोडल अधिकारी शिकायतकर्ता और बैंक
के बीच सुलह करवाने का प्रयास करता
है। लोकपाल मामला सुलझाने के लिए
ऐसी किसी भी प्रक्रिया को आपना सकता
है, जिसे वह न्यायोचित समझे। इसके
अलावा लोकपाल को लगता है कि किसी
मामले में दोनों पक्षों को समझौता कर
लेना चाहिए। और दोनों पक्ष उसके इस
फैसले पर तय समय में अमल नहीं करते
हैं तो वह शिकायत को रद्द कर सकता है.
लोकपाल की शक्तियां
• शिकायत सही पाए जाने पर लोकपाल ग्राहक
की पीड़ा, उसे हुई मानसिक परेशानी तथा
शिकायतकर्ता द्वारा किए गए खर्च के लिए
अधिकतम एक लाख रुपए मुआवजा देने का
आदेश जारी कर सकता है।
• उसे यह शक्ति नहीं है कि ऐसा कोई अवॉर्ड
पारित करे जो ग्राहक को हुई हानि से अधिक राशि
का हो। इसकी अधिकतम सीमा 10 लाख रु.
तक है। अवॉर्ड पारित करने की एक सीमा तय है।
. . . वर्ना मामला रद्द हो जाएगा
जिस बैंक के खिलाफ लोकपाल ने कोई फैसला
दिया है, वह बैंक पर तब तक लागू नहीं माना
जाएगा, जब तक ग्राहक पत्र जारी होने के 15
दिन के भीतर 'मामला निपटान का स्वीकृति-
पत्र' नहीं दे देता। ग्राहक ने अपनी व्यस्तता के
चलते यहां समय का ध्यान नहीं रखा तो फैसला
16वें दिन अपने आप रद्द मान लिया जाएगा।
आपकी शिकायत रद्द करने के कुछ कारण
• लोकपाल को लगता है कि शिकायत सिर्फ परेशान करने के लिए है। बगैर किसी
कारण या दुर्भावना से प्रेरित होकर की गई है तो वह उसे अस्वीकार कर सकता है।
• उसे लगे कि मामला अधिकार क्षेत्र से बाहर है। या सबूत अधूरे लगें, संबंधित व्यक्ति
बयान देने हाजिर न हो अथवा शिकायत कार्रवाई के लायक न हो।
• उसे लगे कि इस मामले में निर्णय नहीं दिया तो भी चलेगा, क्योंकि इससे
शिकायतकर्ता को कोई लाभ या हानि नहीं होगी। या उसे लगता है कि इस विषय पर कार्रवाई उचित नहीं है तो लोकपाल निर्णय अंतिम होगा।
म्यूचअल फंड, बीमा संबंधी शिकायत भी सुनेगा लोकपाल
लोकपाल सेवा के अंतर्गत ग्राहक अब शिकायत के
उन मामलों की भी अपील कर सकते हैं जो क्लोज कर
दिए गए हैं। यानी आप किसी फैसले से संतुष्ट नहीं हैं तो
अपना केस रि-ओपन करा सकते हैं।
बैंकिंग लोकपाल सेवा को संशोधित कर अब
इसका दायरा बढ़ा दिया गया है। भारतीय रिजर्व
बैंक (आरबीआई) द्वारा अपने कार्यक्षेत्र में
लोकपालों को अब नई जिम्मेदारी दी गई है,
जिसमें इंश्योरेंस पॉलिसी या म्यूचुअल फंड
स्कीम जैसे थर्ड पार्टी प्रॉडक्ट्स से संबंधित
शिकायतें सुनने का अधिकार भी रहेगा।
म्यूचुअल फंड में निवेश को लेकर लोगों का
रुझान बढ़ा है। इसलिए म्यूचुअल फंड तथा
जीवन बीमा निगम में भ्रामक जानकारी देकर
पॉलिसी बेचने या निवेश करवाने की शिकायतें
लगातार मिल रही हैं। निवेशकों के साथ
धोखाधड़ी के मामले सामने आने के बाद ऐसे
लोगों की परेशानी दूर करने के लिए लोकपाल
को यह मामले भी निपाटने होंगे। इसके अलावा
मोबाइल और डिजिटल बैंकिंग सर्विस में कोई
कमी पाए जाने पर भी संबंधित बैंक शाखा
के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई जा सकती
है। संशोधित सेवा में लोकपाल द्वारा जारी की
जाने वाली अवॉर्ड राशि की सीमा 10 लाख से
बढ़ाकर 20 लाख कर दी गई है। यहां हम कुछ
प्रश्नों के उत्तर दे रहे हैं-
सामान्य तौर पर पूछे जाने वाले प्रश्न
•अॉनलाइन शिकायत दर्ज कैसे कराएं?
www.bankingombudsman.rbi.org.in
परं ऑनलाइन अथवा इ मेल भेजकर अपनी
शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इसके अलावा
शिकायत का एक निर्धारित फॉर्म भी बैंकों में
उपलब्ध है, उसे भरकर भेज सकते हैं। आप
ज्यादा जानकारी नहीं रखते हैं तो सादे कागज
पर शिकायत लिखकर भी लोकपाल को डाक
से भेज सकते हैं।
•कितने बैंकिंग लोकपाल नियुक्त हैं?
21 बैंकिंग लोकपाल हैं। ज्यादातर राज्य की
राजधानियों में स्थित हैं। आरबीआई की साइट
से इनके एड्रेस ले सकते हैं।
•आवेदन में क्या विवरण जरूरी हैं?
शिकायतकर्ता का नाम-पता। बैंक शाखा का
नाम-पता। क्या शिकायत है, उसके दस्तावेज।
•लोकपाल द्वारा जारी अवॉर्ड बैंक को मंजूर
नहीं तो क्या होगा?
आपकी तरह बैंक के पास भी ऑप्शन है
कि वह इस फैसले के खिलाफ अपीलीय
प्राधिकारी के सामने अपील दायर करे।
• लोकपाल को कोई कानूनी शक्ति है?
हां, वह अर्द्ध न्यायिक प्राधिकरण है। मध्यस्थता
के लिए बैंक और ग्राहक को अपने पास बुलाने
की शक्ति है।
• एनआरआई की शिकायतें भी सुनी जाती हैं?
हां, ऐसे अनिवासी भारतीय जो भारत की बैंक
में विदेश से धन जमा कराते हैं। किसी प्रकार का
लेन-देन करते हैं, उनकी शिकायतें सुनता है।
•मैं लोकपाल और अपीलीय अधिकारी के
निर्णय से संतुष्ट नहीं हूं, क्या करूं?
ऐसे में आप आरबीआई को शिकायत भेज
सकते हैं, क्योंकि ये दोनों अधिकारी उसी के
द्वारा तय किए गए हैं। इसके अलावा उपभोक्ता
फोरम में मामला ले जाने का ऑप्शन तो
आपके पास है ही।
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