वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के जरिये भी होगी आपकी सुनवाई . . .
आज ग्राहकों के साथ जमाखोरी, मिलावट, बिना मानक की वस्तुओं की बिक्री,अधिक दाम, गारंटी बाद भी सर्विस न देना, ठगी जैसे मामले होते हैं। इन सब से निपटनेके लिए ही यह कानून बनाया गया है।
उपभोक्ता वह व्यक्ति है जो अपने इस्तेमाल
के लिए कोई वस्तु खरीदता है या सेवा प्राप्त
करता है। इसमें वह व्यक्ति शामिल नहीं है जो
किसी वस्तु को दोबारा बेचने के लिए उसे
हासिल करता है। इसमें ईशॉपिंग, टेलीशॉपिंग,
मल्टी लेवल मार्केटिंग या सीधे खरीद के जरिये
किया जाने वाला सभी तरह का ऑफलाइन
या ऑनलाइन लेन-देन शामिल है। इसलिए
उपभोक्ता के हितों की रक्षा करने के लिए
सरकार ने उपभोक्ता संरक्षण कानून यानी
कंज्यूमर एक्ट बनाया है। जनता के हितों की
अनदेखी न हो, इसलिए सरकारी नियंत्रण वाली
संस्था उपभोक्ता फोरम में आपकी शिकायत
पर निष्पक्ष होकर फैसले देती है। हाल में तीन
दशक पुराने उपभोक्ता संरक्षण कानून, 1986
को बदल दिया गया है। इसकी जगह उपभोक्ता
संरक्षण कानून, 2019 ने ली है। नए कानून
में उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखते
हुए पुराने नियमों की खामियां दूर की गई हैं।
नए कानून की कुछ खूबियों में सेंट्रल रेगुलेटर
का गठन, भ्रामक विज्ञापनों पर भारी पेनल्टी,
ई-कॉमर्स फर्मों और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस
बेचने वाली कंपनियों के लिए सख्त दिशानिर्देश
तथा कार्रवाई करना शामिल हैं।
देश में कहीं भी करें शिकायतः नए कानून
में एक और बड़ा बदलाव यह है कि उपभोक्ता
अब कहीं से भी शिकायत दर्ज कर सकता है।
पहले वहीं शिकायत दर्ज करा सकते थे, जहां
से वस्तु खरीदी है। इसके अलावा कानून में
उपभोक्ता को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये भी
सुनवाई में शिरकत करने की इजाजत है। इससे
उपभोक्ता का पैसा और समय दोनों बचेंगे।
उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के अधिकार
* ऐसी वस्तुओं और सेवाओं की मार्केटिंग के
खिलाफ सुरक्षा प्रदान करना जो जीवन और
संपत्ति के लिए खतरनाक हैं।
* गुणवत्ता, मात्रा, शक्ति, शुद्धता, मानक और
उत्पादों या सेवाओं के मूल्य के बारे में सूचित
करने का अधिकार। ताकि व्यापार के अनुचित
तरीकों के खिलाफ आपकी रक्षा हो सके।
* जहां संभव हो, आश्वस्त होने का अधिकार,
प्रतिस्पर्धी कीमतों पर विभिन्न प्रकार के सामान,
उत्पादों या सेवाओं तक पहुंच का अधिकार।
* सुनवाई का अधिकार, उचित मंचों पर
उपभोक्ता के हितों को उठाने का अधिकार।
* प्रतिबंधात्मक व्यापार प्रथाओं तथा
उपभोक्ताओं के शोषण के खिलाफ निवारण
के साथ ही मुआवजे की मांग करना।
एक करोड़ रु. तक के मामले सुनेगी जिला अदालतें
पहले उपभोक्ताओं के हितों के लिए सख्त कानून नहीं थे। ग्राहक संगठित
नहीं होने से उनकी आवाज सुनी नहीं जाती थी। इसलिए ग्राहक आंदोलन की.
शुरुआत हुई और 15 मार्च को अंतरराष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस मनाया जाने लगा।
उपभोक्ताओं की शिकायतें निपटाने के लिए
जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर उपभोक्ता
अदालतों (कंज्यूमर रिड्रेसल कमीशन) की
स्थापना की गई है। 2019 में संशोधित नए
कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट में उपभोक्ता अदालतों
को और शक्तियां देकर इनके क्षेत्राधिकार को
बढ़ाया गया है। अब जिला आयोग 1 करोड़ रुपए
तक हर्जाने का आदेश दे सकता है। राज्य आयोग
को 10 करोड़ तक का अधिकार है। वहीं, इससे
अधिक की राशि का हर्जाना करने का अधिकार
राष्ट्रीय आयोग को है, यह सब पहले नहीं होता था।
अब, कंज्यूमर द्वारा की गई शिकायत राज्य और
राष्ट्रीय सीडीआरसीज़ में फाइल की जा सकती है।
जिला सीडीआरसी के आदेश के खिलाफ राज्य
सीडीआरसी में सुनवाई होगी। राज्य सीडीआरसी
के आदेश के खिलाफ राष्ट्रीय सीडीआरसी में
सुनवाई की जाएगी। अंतिम अपील का अधिकार
सर्वोच्च न्यायालय को होगा।
नए कंस्यूमर एक्ट-2019 की वशेषताएँ
* उपभोक्ता हित सर्वोपरि : यह अधिनियम
उन मामलों के खिलाफ इस्तेमाल होगा जहां
उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन होता
हो। व्यापार के अनुचित तरीकों से ग्राहक
को भ्रमित किया जाता हो। कंज्यूमर हित
प्राधिकरण के पास खुद का विंग होगा जो
विभिन्न जांच करने के लिए स्वतंत्र रहेगा।
इसमें इन्वेस्टीगेशन के साथ संपत्ति या वस्तु
जब्त करने की शक्ति भी शामिल है।
* विज्ञापन पर जुर्माना : किसी उत्पाद या
सेवा का झूठा प्रचार करने या गारंटी देकर
उपभोक्ताओं को गुमराह करने वाले विज्ञापन
जारी होते हैं। ऐसे विज्ञापनदाताओं के
खिलाफ इस नए कानून में कार्रवाई करने का
अधिकार है। भ्रामक विज्ञापन देने वालों पर
अधिकतम 10 लाख रुपए तक का जुर्माना
लगाया जा सकता है। दोबारा अपराध करने
पर यह 50 लाख रु. हो सकता है।
• उत्पाद निर्माता पर कार्रवाई का अधिकार : खराब वस्तु बेचने के कारण ग्राहक का
नुकसान हो सकता है। यह नया कानून ऐसे उत्पाद निर्माता व्यक्ति, कंपनी के खिलाफ
कार्रवाई का अधिकार देता है। ग्राहक को हुई क्षति की पूर्ति के लिए अब वस्तु बेचने वाली
कंपनी को जिम्मेदार ठहराया जा सकेगा। ई-शॉपिंग पर भी यह लागू रहेगा।
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