झूठी शिकायत पर आपको भी मिल सकती है सजा
जिला, राज्य या राष्ट्रीय आयोगों के आदेशों का पालन नहीं करने वाले को एक से तीन महीने
का कारावास हो सकता है। उस पर 25 हजार रुपए जुर्माना भी लगाया जा सकता है, जिसे एक
लाख रुपए तक बढ़ाया जा सकता है।
कंज्यूमर एक्ट तथा कंज्यूमर फोरम ग्राहक के हित की रक्षा करने के लिए बनाए गए
हैं। अगर ग्राहक के साथ किसी प्रकार की धोखाधड़ी होती है तो बिना डरे उपभोक्ता कोर्ट
या फोरम का रुख करना चाहिए। नुकसान के सभी तथ्यों, सबूतों को शिकायत करने से
पूर्व एक फाइल में व्यवस्थित लगाएं। ऑफ लाइन शिकायत कर रहें हैं तो उपभोक्ता फोरम
कार्यालय से फॉर्म की फीस भरकर शिकायत को प्रोसेस करें और ऑनलाइन शिकायत के
लिए नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन की वेबसाइट पर लॉगऑन करें। लेकिन उसके पहले यह
भी सुनिश्चित करना चाहिए कि कहीं आप गलत तो नहीं हैं? किसी भी व्यापारी, विक्रेता
या कंपनी पर गलत आरोप लगाकर शिकायत करना गैर कानूनी है, अपराध है। ऐसा करने
पर ग्राहक को भी जुर्माना और सजा हो सकती है। जिसके खिलाफ आपने शिकायत की है,
वह उल्टा आप पर हर्जाना ठोंक सकता है। ऐसे में आप मुसीबत में पड़ जाएंगे, इसलिए
झूठी शिकायत करने से बचें। शिकायत दर्ज होने पर फोरम स्वतः मामले की सुनवाई शुरू
कर देगा।
मामला क्या है, कितनी राशि का है, इसके हिसाब से शिकायत करने की जगह तथा
मापदंड तय किए जाते हैं। जैसे कि-
डिस्ट्रिक्ट कंज्यूमर फोरम : अगर शिकायत 20 लाख की रकम तक की है तो डिस्ट्रिक्ट
कंज्यूमर फोरम के पास शिकायत करें।
स्टेट कंज्यूमर फोर : मामला 20 लाख से 1 करोड़ की रकम तक का है, तो स्टेट कंज्यूमर
फोरम को शिकायत करें।
नेशनल कंज्यूमर फोरम : 1 करोड़ की रकम से ऊपर का मामला है तो नेशनल कंज्यूमर
फोरम के पास शिकायत करनी होगी।
जबरन वसूली-धोखाधड़ी: ऐसे मामलों
में उपभोक्ता फोरम के शिकायत केंद्र
(1800114000) पर सुबह 9:30 से शाम
5.30 बजे तक शिकायत कर सकते हैं।
टोल-फ्री नबरः इस नंबर 18001800300
पर मैखिक शिकायत दर्ज करें।
एसएमएस: 8130009809 पर करें।
ऑनलाइन: core.nic.in पर शिकायत दर्ज
करा सकते हैं।
अपना केस लड़ने के लिए आप ही वकील होते है
फोरम 21 दिन में तय कर लेता है कि आपका केस लेने लायक है या नहीं। फिर संबंधित संस्थान से स्पष्टीकरण मांगने के साथ ही ग्राहक को 90 दिन में न्याय दिलाने की प्रक्रिया आरंभ हो जाती है।
किसी वस्तु का उपभोग करने वाला व्यक्ति यानी उपभोक्ता परेशान न हो,
उसे जल्द न्याय मिले, इसके लिए ही ऐसे फोरम की स्थापना की गई है।
उपभोक्ता फोरम अर्द्ध-न्यायिक निकाय होते हैं, जो सरल तरीके से और त्वरित
न्याय प्रदान करते हैं। इन फोरम को सिविल न्यायालय की जटिल न्यायिक
प्रक्रियाओं से मुक्त रखा गया है। अतः, इनमें वकील अथवा किसी अन्य तर्क
देने वाले व्यक्ति की कोई आवश्यकता नहीं होती है। उपभोक्ता ही मामला
दायर करता है, वही अपनी शिकायत सबूतों के साथ पेश करता है और वही
स्वयं का प्रतिनिधि होता है। यदि आप यह सब करने में खुद को असमर्थ
पाते हैं तो ही वकील की मदद लें। इस भाग में हम कुछ जरूरी प्रश्नों के
उत्तर दे रहे हैं-
आमतौर पर पूछे जाने वाले प्रश्नों के उतर
* बस, रेल, विमान सेवा संबंधी शिकायत भी कर सकते हैं क्या?
- हां, ये सभी सेवा में कमी के मामले बनते हैं। बगैर सूचना बस निरस्त करना, ज्यादा
किराया वसूलना, ट्रेन लेट की सूचना न देना या गलत देने से आपकी कोई हानि होना।
इसी तरह फ्लाइट के मामले में भी शिकायत कर सकते हैं।
* शिकायत कब दर्ज कराई जा सकती है? दो वर्ष के भीतर। इसका मतलब है कि जिस
दिन वस्तुओं में दोष आया या पाया गया, उस समय से दो वर्ष की अवधि में।
* किस राज्य अथवा शहर में दर्ज होगी? -आप जहां रहते हैं, वहां के फोरम में दर्ज
कराएं। आपने सामान कहीं से भी खरीदा हो, शिकायत आपके अपने होम टाउन में दर्ज करा
सकते हैं। पुराने कानून में ऐसी व्यवस्था नहीं थी।
* कौन उपभोक्ता नहीं कहलाएगा? - वह व्यक्ति जो मुफ्त में वस्तुएं प्राप्त करता
है। उपहार लेता है। जो मुफ्त सेवाएं लेता है। जो वस्तुएं बेचता है। जो किसी व्यावसायिक
उपयोग के लिए किसी से दान में वस्तु प्राप्त करता है, ये उपभोक्ता नहीं कहलाएंगे।
* सभी फोरम कहां हैं, राष्ट्रीय आयोग का पता क्या है? -जिला मंच प्रत्येक जिले में होता है। राज्य
आयोग हर राज्य की राजधानी में तथा राष्ट्रीय आयोग नई दिल्ली में स्थित है। नई दिल्ली का
पता : उपभोक्ता न्याय भवन, एफ. ब्लॉक,
जी.पी.ओ. कॉम्पलेक्स, आई.एन.ए., नई
दिल्ली 1100231 अधिक जानकारी के
लिए वेबसाइट:- http://ncdrc.nic.in पर क्लिक करें।
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